बिहार के किशनगंज जिले में हाल ही में एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने यात्रियों को हैरान भी किया और रेलवे नियमों को लेकर नई चर्चा भी छेड़ दी। मालदा से सिलीगुड़ी जा रही डेमू ट्रेन अचानक ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पर करीब तीन घंटे तक खड़ी रही। वजह थी लोको पायलट का पैâसला। दरअसल, उन्होंने अपनी ९ घंटे की ड्यूटी पूरी होने के बाद ट्रेन चलाने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि रेलवे के नियमों के मुताबिक, तय समय से ज्यादा बिना आराम के ट्रेन चलाना सुरक्षित नहीं होता। इस वजह से उन्होंने साफ कह दिया कि शिफ्ट खत्म होने के बाद वे आगे ट्रेन नहीं चलाएंगे, वे थक चुके हैं। इस पैâसले के कारण ट्रेन में बैठे सैकड़ों यात्रियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा।
रिपोर्ट के मुताबिक, डेमू ट्रेन दोपहर करीब २ बजकर ५२ मिनट पर ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर १ पर पहुंची थी। ट्रेन में व्यापारी, मजदूर और परिवारों समेत सैकड़ों लोग सफर कर रहे थे। इन्हें सिलीगुड़ी, किशनगंज और आसपास के इलाकों तक जाना था। लेकिन स्टेशन पहुंचने के बाद ट्रेन आगे नहीं बढ़ी। कुछ देर बाद पता चला कि लोको पायलट ने अपनी ड्यूटी पूरी होने का हवाला देते हुए आगे ट्रेन चलाने से मना कर दिया है। इसके बाद ट्रेन करीब तीन घंटे तक स्टेशन पर ही खड़ी रही। बता दें कि पैसेंजर ट्रेनों में आमतौर पर लोको पायलट की शिफ्ट ८ घंटे से ज्यादा नहीं रखी जाती। इसलिए अधिकतर मामलों में ८ घंटे के बाद क्रू बदल दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर अगर कोई ट्रेन दिल्ली से शाम ४ बजे पटना के लिए निकलती है और ८ घंटे बाद लखनऊ पहुंचती है तो वहां पहला लोको पायलट बदल दिया जाएगा।
आखिर कितने घंटे की होती है ड्यूटी
रेलवे के नियमों के मुताबिक, सुरक्षित संचालन के लिए लोको पायलट एक बार में ९ से १० घंटे तक काम करता है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर काम के घंटे बढ़ाए भी जा सकते हैं। कई बार केवल ४ घंटे की ड्यूटी होती है तो कई बार ये ९ घंटे तक भी पहुंच जाती है। अगर तय समय से ज्यादा काम करना पड़े तो उसे ओवरटाइम माना जाता है और उसका अलग से भुगतान किया जाता है।
