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पड़ताल : बजट के आंकड़ों से बढ़ा सियासी तापमान… कर्ज की बैसाखी पर सरकार!

-राजस्व घाटा `४० हजार करोड़ के पार

-आर्थिक मोर्चे पर सरकार बेबस

-`समर्थन’ ने खोली महायुति के बजट की पोल

धीरेंद्र उपाध्याय

राज्य के बजट के आंकड़ों ने महाराष्ट्र की सियासत में नया तूफान खड़ा कर दिया है। महायुति सरकार की आर्थिक नीतियों पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि राज्य का कर्ज ११ लाख २ हजार ६५४ करोड़ रुपए के पार पहुंच चुका है और राजस्व घाटा ४० हजार ५५२ करोड़ रुपए से अधिक हो गया है। इतना ही नहीं, पिछले १० वर्षों में २ लाख करोड़ रुपए से ज्यादा टैक्स वसूली में भी सरकार नाकाम रही है। इन आंकड़ों को लेकर विपक्ष का आरोप है कि सरकार विकास के बजाय कर्ज की बैसाखी पर खजाना चला रही है और आर्थिक मोर्चे पर पूरी तरह बेबस नजर आ रही है। बजट के भीतर छिपे इन्हीं तथ्यों को सामने लाते हुए समर्थन ने महायुति सरकार के वित्तीय प्रबंधन की पोल खोलने का दावा किया है, जिससे राज्य की आर्थिक दिशा को लेकर सियासी बहस और तेज हो गई है।
मुख्यमंत्री व वित्त मंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा ६ मार्च को पेश बजट के अनुसार, वर्ष २०२६-२७ का कुल आकार ८ लाख ३३ हजार ९९३ करोड़ रुपए से अधिक है, जो पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान से करीब २० हजार करोड़ रुपए ज्यादा है। वहीं राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद ५४ लाख ८ हजार ७९४ करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जिसमें पिछले वर्ष की तुलना में ६.०३ प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद जताई गई है। हालांकि, आंकड़े यह भी बता रहे हैं कि सरकार को बढ़ते खर्च के लिए भारी कर्ज का सहारा लेना पड़ रहा है। वर्ष २०२६-२७ में राज्य सरकार १ लाख ५० हजार ३८१ करोड़ रुपए से अधिक का नया कर्ज लेने वाली है। दूसरी ओर कुल राजस्व प्राप्ति ६ लाख १६ हजार ९८ करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जबकि राजस्व व्यय ६ लाख ५६ हजार ६५१ करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा। इस कारण राजस्व घाटा और बढ़ गया है।
वेतन, पेंशन और ब्याज पर भारी खर्च
समर्थन के मुताबिक, वित्तीय दबाव का एक बड़ा कारण वेतन, पेंशन और ब्याज पर होने वाला भारी खर्च भी है। बजट के अनुसार, इन मदों पर ३ लाख ३८ हजार ३८५ करोड़ रुपए खर्च होंगे, जो कुल राजस्व व्यय का ५१.५३ प्रतिशत है। इस तरह आधे से ज्यादा बजट पहले से तय खर्चों में ही चला जाएगा।
टैक्स वसूली व्यवस्था दोनों ही कमजोर
वहीं एक और चौंकाने वाला तथ्य यह है कि पिछले १० वर्षों में राज्य सरकार करीब २ लाख करोड़ रुपए से अधिक का कर राजस्व वसूल करने में विफल रही है। यह रकम वर्तमान राजस्व प्राप्ति का लगभग ३२.५५ प्रतिशत है। इन आंकड़ों को लेकर विपक्ष का आरोप है कि सरकार की आर्थिक नीति और टैक्स वसूली व्यवस्था दोनों ही कमजोर पड़ गई हैं। ऐसे में बढ़ते कर्ज, बढ़ते घाटे और कम होती वसूली ने राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर चिंता और सियासी टकराव दोनों को तेज कर दिया है।
बजट के प्रमुख आंकड़े
कुल बजट आकार – `८.३३ लाख करोड़
राज्य पर कुल कर्ज – `११.०२ लाख करोड़
नया कर्ज लेने की योजना – `१.५० लाख करोड़
अनुमानित राजस्व घाटा – `४०,५५२ करोड़
वेतन-पेंशन-ब्याज पर खर्च – `३.३८ लाख करोड़

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