द्रुप्ति झा
करोड़ों खर्च फिर भी हर साल बरसात में भरते हैं नाले और डूबती है मुंबई
मुंबई महानगरपालिका क्षेत्र में हर वर्ष १ मार्च से मानसून आने से पहले नालों की सफाई का कार्य शुरू करने का नियम है, लेकिन इस वर्ष आधा मार्च बीतने के बाद भी कई स्थानों की नालों की सफाई का कार्य शुरू होता दिखाई नहीं दे रहा है। इससे बारिश के मौसम में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होने की आशंका नागरिकों द्वारा व्यक्त की जा रही है। इससे पहले मनपा में प्रशासक राज चल रहा था। अब जनप्रतिनिधि चुने जा चुके हैं और महापौर, स्थायी समिति अध्यक्ष और नगरसेवक कार्यरत हैं। ऐसी स्थिति में नालों की सफाई का कार्य आखिर किस स्तर पर अटका हुआ है, इस संबंध में स्पष्टता का होना जरूरी है।
काम सिर्फ दिखावे भर का
मनपा ने २०२६-२७ के लिए ८०,९५२ करोड़ रुपए का बजट पेश किया है, जिसमें से सीवेज निपटान परियोजना के लिए ५,६९० करोड़ रुपए का बड़ा आवंटन किया गया है। यह राशि नालों की सफाई और अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत करने के लिए की गई है, उसके बावजूद अभी तक काम शुरू नहीं किया गया है। यही वजह है कि हर बार बारिश से पहले चलाए गए अभियान साफ-सफाई के मामले में अधूरे रह जाता है और मुंबई की सड़कें पानी से लबालब हो जाती हैं। सूचना अधिकार कार्यकर्ता अनिल गलगली ने कहा कि यदि ठेकेदार नहीं मिल रहे हैं या निविदा प्रक्रिया में देरी हो रही है तो महानगरपालिका को अपने ही कर्मचारियों के माध्यम से नालों की सफाई का कार्य करवाना चाहिए। इससे एक ओर सार्वजनिक धन की बचत होगी और दूसरी ओर कार्य की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहेगी। पालिका प्रशासन को इस विषय पर तुरंत निर्णय लेकर पूरे मुंबई में नालों की सफाई का कार्य तेजी से शुरू करना चाहिए, ऐसी मांग भी गलगली ने की है।
मानसून में लोगों की
परेशानियों की वजह
मुंबई में हर साल मानसून के दौरान जलभराव एक गंभीर समस्या है, जिसके मुख्य कारणों में मनपा द्वारा नालों की अपर्याप्त सफाई, प्लास्टिक कचरे से जाम नालियां, और पुराना ड्रेनेज सिस्टम शामिल है। इसके अलावा, निचले इलाकों (जैसे दादर, माहिम) में हाई टाइड के साथ भारी बारिश का मेल पानी के निकास को मुश्किल बना देता है। हर साल बारिश के समय में मुंबई डूबने की खबरें सामने आती है, जिसकी मुख्य वजह ठीक तरह से गटरों का साफ नहीं होना है। हर बार मनपा द्वारा किए दावे झूठ साबित हो जाते हैं। हर साल की तरह इस बार भी अधिकारियों ने निर्देश तो दिए हैं उसके बावजूद भी मानसून से पहले रहे अधूरे कामों की वजह से लोगों की परेशानी बढ़ जाती है। मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन के बड़े और छोटे ड्रेन से सिल्ट हटाने का सारा काम मानसून से पहले पूरा हो जाने का निर्देश दिया गया, जिसका काम अभी तक शुरू नहीं किया गया है। बता दें कि नालों से निकाली गई गाद का ४८ घंटे के अंदर सही तरीके से निपटान किए जाने की बात कहीं गई है, जो अक्सर नालों की सफाई के बाद नालों के किनारे गाद को देखा जाता है। अब देखनेवाली बात है कि क्या इस साल मानसून के दौरान लोगों को होनेवाली परेशानी कम होगी या हर साल की तरह मुंबईकर वर्ष २०२६ के मानसून में भी उन्हीं हालातों से दो चार होंगे।
