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पड़ताल : विवादों में मुंबई की जलापूर्ति बढ़ाने की योजना…गारगाई परियोजना पर ‘ब्रेक’!

– ५,३९६ करोड़ रुपए तक पहुंची लागत

-३.१ लाख पेड़ों की कटाई का अंदेशा

-वनरोपण के लिए जमीन अधूरी

-स्थाई समिति ने मनपा से मांगा पूरा हिसाब

धीरेंद्र उपाध्याय

मुंबई की जलापूर्ति बढ़ाने के लिए प्रस्तावित गारगाई जलाशय परियोजना अब गंभीर विवादों में घिर गई है। करीब ५,३९६ करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी लागत, ३.१ लाख पेड़ों की संभावित कटाई और वनरोपण के लिए अधूरी जमीन ने इस महत्वाकांक्षी योजना पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालात इतने उलझ गए हैं कि स्थाई समिति ने परियोजना पर फिलहाल ‘ब्रेक’ लगाते हुए मनपा से पूरी लागत, पर्यावरणीय प्रभाव और भूमि अधिग्रहण की स्थिति पर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है, जिससे शहर की भविष्य की जलापूर्ति योजना पर अनिश्चितता बढ़ गई है।
मनपा की यह महत्वाकांक्षी योजना मुंबई की जल आपूर्ति में प्रतिदिन ४४० मिलियन लीटर (एमएलडी) की वृद्धि करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। प्रस्ताव के अनुसार, पालघर जिले के ओगड़ा गांव के पास लगभग ६९ मीटर ऊंचा जलाशय बनाया जाएगा और वहां से पानी को मोडक सागर जलाशय में मोड़ने के लिए लगभग २.२ किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जाएगी। हालांकि, परियोजना के क्रियान्वयन से जुड़े कई अहम पहलू अब तक अधूरे हैं, जिससे इसकी व्यवहार्यता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा मुद्दा परियोजना की बढ़ती लागत को लेकर है। शुरुआती अनुमान के मुकाबले लागत लगातार बढ़ती गई और अब पूरी परियोजना की लागत ५,३९६ करोड़ रुपए तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। जलाशय निर्माण का ठेका सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी सोमा कंस्ट्रक्शंस को देने का प्रस्ताव है, लेकिन निर्माण लागत में १७१ करोड़ रुपयों की अतिरिक्त बढ़ोतरी के बाद अनुबंध मूल्य ३,२७६ करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। इसी कारण स्थाई समिति ने प्रस्ताव को मंजूरी देने से पहले विस्तृत जानकारी मांगी है।
वनरोपण के लिए ६५० हेक्टेयर जमीन की जरूरत
पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर भी गंभीर चिंता सामने आई है। परियोजना के कारण तानसा वन्यजीव अभ्यारण्य क्षेत्र में लगभग ३.१ लाख पेड़ों की कटाई होने की संभावना जताई गई है। नियमों के अनुसार, इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के बदले मनपा को पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के लिए अन्य स्थानों पर वनरोपण करना अनिवार्य है। इसके लिए करीब ६५० हेक्टेयर जमीन की जरूरत है।
मनपा प्रशासन का दावा
मनपा प्रशासन का दावा है कि अब तक ५७० हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण कर लिया गया है। लेकिन अभी भी ८० हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण बाकी है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि जो जमीन चिन्हित की गई है, वह चंद्रपुर, हिंगोली और वाशिम जिलों में स्थित है, जो प्रस्तावित जलाशय स्थल से करीब ८०० किलोमीटर दूर है। इतनी दूर वनरोपण किए जाने की व्यवहार्यता और पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थाई समिति के सदस्यों का कहना है कि जब तक जमीन अधिग्रहण और वनरोपण की पूरी प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होती, तब तक परियोजना को आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा।
३४ प्रतिशत पानी चोरी और रिसाव में बर्बाद
मुंबई में फिलहाल तानसा, भातसा, मोडक सागर, तुलसी, विहार, अपर वैतरणा और मध्य वैतरणा समेत सात जलाशयों से करीब ४,००० एमएलडी पानी की आपूर्ति की जाती है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार शहर में ३४ प्रतिशत पानी चोरी और रिसाव में बर्बाद हो जाता है, जबकि बढ़ते शहरीकरण और प्रदूषण के कारण पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। अनुमान है कि २०४१ तक मुंबई की जल मांग ६,९०० एमएलडी तक पहुंच सकती है। ऐसे में गारगाई जलाशय जैसी परियोजनाओं को शहर के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन अधूरी तैयारी, बढ़ती लागत और पर्यावरणीय जोखिमों ने इस महत्वाकांक्षी योजना को फिलहाल सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।

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