मुख्यपृष्ठस्तंभपड़ताल : वंदे मेट्रो का बढ़ा इंतजार : मुंबईकरों की उम्मीदों को...

पड़ताल : वंदे मेट्रो का बढ़ा इंतजार : मुंबईकरों की उम्मीदों को झटका … एसी लोकल की आस अधूरी, रेलवे ने फिर बढ़ाई तारीख

जेदवी

मुंबई की भीड़भाड़ वाली लोकल ट्रेनों में रोजाना सफर करनेवाले लाखों यात्रियों के लिए एसी ‘वंदे मेट्रो’ लोकल एक बड़ी उम्मीद बनकर सामने आई थी। लेकिन अब यह उम्मीद फिर से लंबी प्रतीक्षा में बदलती नजर आ रही है। भीषण गर्मी में पसीने से तरबतर होकर सफर करने को मजबूर मुंबईकरों को राहत देने वाली इस परियोजना की प्रक्रिया में एक बार फिर देरी हो गई है।
मुंबई रेलवे विकास निगम (एमआरवीसी) द्वारा २,८५६ एसी ‘वंदे मेट्रो’ कोच खरीदने के लिए जारी किए गए टेंडर अब अप्रैल के बजाय १५ मई २०२६ को खोले जाएंगे। पहले इन टेंडरों को अप्रैल में खोलने की योजना थी, लेकिन बोलीदाताओं द्वारा उठाए गए तकनीकी सवालों और स्पष्टीकरण की मांग के चलते समय-सीमा आगे बढ़ा दी गई।
यानी एक बार फिर वही पुरानी कहानी ‘तारीख पर तारीख’ और उसका खामियाजा भुगतने के लिए मजबूर हैं मुंबईकर। मुंबई की लोकल ट्रेनें पहले ही अपनी क्षमता से कई गुना ज्यादा यात्रियों का बोझ उठा रही हैं। गर्मी के मौसम में एसी सुविधा की उम्मीद ने यात्रियों को राहत की उम्मीद दी थी, लेकिन अब यह साफ हो गया है कि यह राहत इतनी जल्दी मिलने वाली नहीं है। रेलवे प्रशासन भले ही इसे तकनीकी प्रक्रिया बता रहा हो, लेकिन जमीन पर हालात अलग ही कहानी कहते हैं। रोजाना भीड़, उमस और गर्मी के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को फिलहाल उसी पुराने सिस्टम पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
‘वंदे भारत’ तर्ज पर
योजना के मुताबिक ‘वंदे भारत’ ट्रेन की तर्ज पर बननेवाली इन नई एसी लोकल ट्रेनों में कई आधुनिक सुविधाएं दी जानी हैं। ट्रेन में फायर और स्मोक डिटेक्शन अलार्म सिस्टम, अंदर और बाहर सीसीटीवी वैâमरे, पैसेंजर इमरजेंसी अलार्म और टॉक-बैक सिस्टम जैसी सुरक्षा सुविधाएं होंगी। इसके अलावा ट्रेन के बाहर एलईडी डिस्प्ले लगाए जाएंगे, जिससे यात्रियों को अगले स्टेशन की जानकारी आसानी से मिल सकेगी।
ट्रेनों में स्वचालित वेंटिलेशन सिस्टम और उच्च क्षमता वाला फिल्ट्रेशन सिस्टम भी लगाया जाएगा, जो यात्रियों की संख्या के अनुसार हवा को नियंत्रित करेगा।
भीड़ का दबाव कम करने का दावा
नई वंदे मेट्रो लोकल के कोचों में वेस्टिब्यूल कनेक्शन होगा, जिससे यात्रियों की आवाजाही आसान होगी और भीड़ का दबाव कुछ हद तक कम किया जा सकेगा। उपकरणों को छत या फर्श के नीचे रखने की योजना है, ताकि यात्रियों के लिए अधिक जगह उपलब्ध हो सके। साथ ही आरामदायक सीटें और दिव्यांग तथा व्हीलचेयर यात्रियों के लिए विशेष स्थान भी उपलब्ध कराया जाएगा।
हालांकि, सवाल यह है कि ये सारी सुविधाएं आखिर मुंबईकरों तक कब पहुंचेंगी?
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, १५ मई से टेंडर प्रक्रिया शुरू होने के बाद इसे पूरा होने में लगभग ४ से ६ महीने लग सकते हैं। अनुबंध के करीब ढाई साल बाद पहली प्रोटोटाइप एसी लोकल मिलने की उम्मीद है और सफल परीक्षण के बाद ४ से ६ वर्षों में पूरी फ्लीट सेवा में शामिल हो सकती है।
यानी साफ है कि जिस परियोजना से मुंबईकरों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद थी, उसका इंतजार अभी और लंबा होनेवाला है।
रेलवे अधिकारी भले ही दावा कर रहे हों कि टेंडर की तारीख आगे बढ़ने से परियोजना की कुल समय-सीमा पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन हकीकत यही है कि हर बार बढ़ती तारीखों का बोझ आखिरकार मुंबईकरों की ही यात्रा पर पड़ता है।
भीड़, गर्मी और थकाऊ सफर के बीच अब मुंबईकरों के मन में एक ही सवाल है कि क्या वंदे मेट्रो लोकल सच में राहत लेकर आएगी या फिर यह सपना भी फाइलों में ही दौड़ता रहेगा?

अन्य समाचार