जेदवी
मुंबई लोकल ट्रेनों में बढ़ती भीड़ को कम करने के लिए शुरू किया गया १५ डिब्बों वाली लोकल ट्रेनों का विस्तार प्रोजेक्ट सुस्त रफ्तार का शिकार हो गया है। करोड़ों यात्रियों को राहत देने के लिए बनाई गई यह योजना अब तक कागजों और अधूरे कामों में ही उलझी हुई नजर आ रही है। स्थिति यह है कि जिन ३४ स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म की लंबाई बढ़ाने का लक्ष्य तय किया गया था, उनमें से अब तक केवल ५ स्टेशनों पर ही यह काम पूरा हो पाया है। नौ साल बीतने के बाद भी परियोजना अधूरी है। ऐसे में रोजाना भीड़ से जूझने वाले लाखों यात्रियों के लिए राहत का सपना फिलहाल अधूरा ही दिखाई दे रहा है।
दरअसल, सीएसएमटी–कल्याण–कसारा और खोपोली कॉरिडोर के ३४ स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म की लंबाई बढ़ाने की योजना बनाई गई थी, ताकि धीमी लाइनों पर भी १५ डिब्बों वाली लोकल ट्रेनें चलाई जा सकें। फिलहाल, स्थिति यह है कि १५ डिब्बों वाली लोकल ट्रेनें केवल फास्ट कॉरिडोर के करीब १० बड़े स्टेशनों सीएसएमटी, दादर, ठाणे और कल्याण जैसे प्रमुख स्टेशनों पर ही रुक पाती हैं। बाकी अधिकांश स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म छोटे होने के कारण इन ट्रेनों को रोकना संभव नहीं है, जिसके चलते धीमी लाइनों पर अभी भी १२ डिब्बों वाली ट्रेनों पर ही निर्भरता बनी हुई है।
दरअसल, सीएसएमटी–कल्याण–कसारा और खोपोली कॉरिडोर के ३४ स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म की लंबाई बढ़ाने की योजना बनाई गई थी, ताकि धीमी लाइनों पर भी १५ डिब्बों वाली लोकल ट्रेनें चलाई जा सकें। फिलहाल, स्थिति यह है कि १५ डिब्बों वाली लोकल ट्रेनें केवल फास्ट कॉरिडोर के करीब १० बड़े स्टेशनों सीएसएमटी, दादर, ठाणे और कल्याण जैसे प्रमुख स्टेशनों पर ही रुक पाती हैं। बाकी अधिकांश स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म छोटे होने के कारण इन ट्रेनों को रोकना संभव नहीं है, जिसके चलते धीमी लाइनों पर अभी भी १२ डिब्बों वाली ट्रेनों पर ही निर्भरता बनी हुई है।
परियोजना में देरी!
इस परियोजना में देरी के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। रेलवे सूत्रों के अनुसार, अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी और काम के बंटवारे में देरी प्रमुख वजहों में शामिल हैं। इसके अलावा सीएसएमटी जैसे ऐतिहासिक और पुराने स्टेशनों पर मौजूद पुरानी संरचनाओं, जैसे सिग्नल बिल्डिंग को हटाने में भी तकनीकी अड़चनें आ रही हैं, जिससे काम की गति प्रभावित हो रही है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना के तहत सीएसएमटी, ठाणे, दिवा, डोंबिवली, कल्याण, वांगनी और खडावली जैसे सात महत्वपूर्ण स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म विस्तार का काम मार्च २०२६ तक पूरा होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, बाकी २७ स्टेशनों पर काम २०२६ के मध्य तक खिंच सकता है। इससे यह साफ है कि यात्रियों को राहत देने वाली इस महत्वपूर्ण योजना की रफ्तार उम्मीद से काफी धीमी है।
इस बीच सीएसएमटी स्टेशन पर प्लेटफॉर्म नंबर ६ के विस्तार का काम अंतिम चरण में बताया जा रहा है। यह काम पूरा होते ही यहां से चलने वाली १५ डिब्बों वाली लोकल सेवाओं की संख्या लगभग दोगुनी हो सकती है। फिलहाल, यहां से करीब २२ सेवाएं संचालित होती हैं, जबकि विस्तार के बाद यह संख्या बढ़कर लगभग ४४ प्रतिदिन तक पहुंच सकती है।
रेलवे का दावा है कि पूरी परियोजना पूरी होने के बाद लोकल ट्रेनों की यात्री वहन क्षमता में करीब २५ प्रतिशत तक बढ़ोतरी होगी। इससे खासतौर पर पीक आवर्स के दौरान होने वाली भीषण भीड़ को कुछ हद तक कम किया जा सकेगा। लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह राहत कब मिलेगी, इस पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
पश्चिमी रेलवे की तुलना में मध्य रेलवे
तुलना करें तो पश्चिमी रेलवे इस मामले में काफी आगे नजर आता है। जहां पश्चिमी रेलवे पर २११ पंद्रह कोच वाली लोकल सेवाएं संचालित होती हैं, वहीं मध्य रेलवे पर ऐसी केवल २२ सेवाएं ही चल रही हैं और वे भी फास्ट कॉरिडोर तक सीमित हैं।
इसके अलावा कल्याण के आगे कसारा और खोपोली रूट के कई स्टेशनों पर अभी भी प्लेटफॉर्म विस्तार का काम बाकी है। वहीं सीएसएमटी स्टेशन पर स्टेबलिंग लाइनों यानी ट्रेनों को खड़ा करने की जगह की कमी भी सेवाओं की संख्या बढ़ाने में बड़ी बाधा बनी हुई है।
