भरतकुमार सोलंकी
मुंबई
वर्तमान वैश्विक माहौल में ईरान-अमेरिका तनाव, बढ़ते क्रूड ऑयल के दाम, महंगाई का दबाव और करेंसी में उतार-चढ़ाव ये सब मिलकर निवेशकों के मन में एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहे हैं: क्या यह समय डरने का है या समझदारी से अवसर पहचानने का?
ताजा आर्थिक संकेत स्पष्ट बताते हैं कि युद्ध जैसे हालातों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार को धीमा कर दिया है, वहीं ऊर्जा कीमतों में उछाल ने महंगाई को फिर से बढ़ाने का खतरा पैदा कर दिया है। यही कारण है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर असमंजस में हैं-कम करें तो महंगाई बढ़े और बढ़ाएं तो विकास रुक जाए। दूसरी ओर, यह भी देखने योग्य है कि इन हालातों के बीच अमेरिकी डॉलर मजबूत बना हुआ है, क्योंकि वैश्विक अनिश्चितता में निवेशक सुरक्षित मुद्रा की ओर भागते हैं। वहीं भारत जैसे देशों में भी केंद्रीय बैंक सक्रिय होकर करेंसी को स्थिर रखने के प्रयास कर रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल-इन हालातों में एक सामान्य निवेशक क्या करे? इतिहास गवाह है कि जब भी बाजार में डर और अनिश्चितता बढ़ती है, तब क्वालिटी एसेट्स सस्ते मिलने लगते हैं। तेल की कीमतों में उछाल और सप्लाई शॉक के कारण बाजार में अस्थिरता जरूर आती है, लेकिन यही समय लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर भी बनाता है।
क्या यह सच नहीं कि जब महंगाई बढ़ती है, तब आपकी बचत की कीमत घटती है? और क्या ऐसे समय में सिर्फ बैंक में पैसा रखकर आप वास्तव में अपनी संपत्ति बचा सकते हैं? या फिर आपको ऐसे एसेट्स में निवेश करना चाहिए जो महंगाई को मात दे सकें?
यहीं पर इक्विटी और म्यूचुअल फंड जैसे विकल्प सामने आते हैं। जो लोग सीधे शेयर चुनने में असमर्थ हैं, उनके लिए प्रोफेशनल फंड मैनेजमेंट के माध्यम से निवेश करना जोखिम को कम कर देता है और अवसर को बढ़ा सकता है।
अंत में सवाल यही है- क्या आप वर्तमान संकट को सिर्फ खतरे के रूप में देखेंगे, या उसे एक अवसर के रूप में समझकर अपनी वेल्थ क्रिएशन की यात्रा को मजबूत करेंगे? क्योंकि सच्चाई यही है-बाजार में असली कमाई तेजी में नहीं, बल्कि अनिश्चितता के समय लिए गए सही निर्णयों में होती है।
(लेखक आर्थिक निवेश मामलों के विशेषज्ञ हैं)
