सामना संवाददाता / मुंबई
देश की आर्थिक राजधानी इस समय भारी प्रदूषण के संकट से जूझ रही है। हर मुंबईकर के शरीर में सांस के जरिये प्रदूषण का जहर उतर रहा है। कभी समुद्री हवाओं और अपेक्षाकृत बेहतर हवा के लिए पहचानी जाने वाली मुंबई अब धीरे-धीरे जहरीली हवा वाले महानगरों की सूची में शामिल होती जा रही है। इसका सीधा असर बच्चों, बुजुर्गों और दमा जैसी बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर पड़ रहा है। इस बीच बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ने मुंबई में तेजी से बिगड़ती हवा की गुणवत्ता पर गंभीर चिंता जताई है। अभिनेत्री ने सोशल मीडिया के जरिए शहर में बढ़ते प्रदूषण पर सवाल उठाते हुए प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
दीपिका ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में मुंबई के एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए मनपा प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने बीएमसी को सीधे टैग करते हुए पूछा कि जब हवा की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है तो आम लोग, खासकर छोटे बच्चे, आखिर वैâसे सांस लें? अभिनेत्री ने अपनी पोस्ट में लिखा कि शहर में रहने वाले लोग, विशेषकर बच्चे, खराब हवा के कारण घुटन महसूस कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यह वैâसे सही हो सकता है कि देश की आर्थिक राजधानी में लोग साफ हवा के लिए तरसें?
पहले भी उठ चुका है मुद्दा
मुंबई का एक्यूआई १५० के पार पहुंच गया है, जिसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक श्रेणी में माना जाता है। प्रदूषण के इस स्तर पर सांस से जुड़ी समस्याएं, एलर्जी और बच्चों व बुजुर्गों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। दीपिका से पहले अभिनेत्री ऋचा चड्ढा और संयमी खेर भी मुंबई की बिगड़ती हवा पर चिंता जता चुकी हैं। इन कलाकारों का कहना है कि शहर में तेजी से बढ़ता प्रदूषण अब गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है।
बच्चों की सेहत पर सबसे बड़ा खतरा
सबसे चिंताजनक बात यह है कि प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ता है। डॉक्टरों के अनुसार, खराब हवा के कारण बच्चों में सांस की बीमारियां, एलर्जी और फेफड़ों की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। अगर यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले वर्षों में यह सार्वजनिक स्वास्थ्य का बड़ा संकट बन सकता है।
प्रदूषण के कारण
मुंबई में इन दिनों चारों तरफ निर्माण कार्यों की भरमार है। मेट्रो, फ्लाईओवर, कोस्टल रोड, गगनचुंबी इमारतें आदि का काम शुरू है। अक्सर देखा जाता है कि निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के नियमों का पालन नहीं किया जाता। दूसरी तरफ मुंबई की सड़कों पर वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ट्रैफिक जाम के कारण घंटों तक चलने वाली गाड़ियों से निकलने वाला धुआं हवा को और जहरीला बना देता है। सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के बजाय निजी वाहनों पर निर्भरता बढ़ती जा रही है, जिसका खामियाजा शहर की हवा भुगत रही है।
