बड़ी गंदगी है बड़ा है तमाशा।
उधर रोशनी है इधर है निराशा ।।
यह जो हवा बह चली आसमानी ।
यही है मुसीबत यही है हताशा ।।
शब्दों में फंसकर कहां आ गए हम।
बड़ी गंदगी है बड़ा है तमाशा।
उधर रोशनी है इधर है निराशा ।।
यह जो हवा बह चली आसमानी ।
यही है मुसीबत यही है हताशा ।।
शब्दों में फंसकर कहां आ गए हम।
अच्छे दिनों का मिला है बताशा ।।
विकसित हुए हैं विकासों के जंगल।
हमको तो दिखता है भारी विकासा ।।
विस्थापितों की फंसी जिंदगी है ।
कहां रोशनी है कहां है दिलासा।।
संतोष हमको पढ़ाते हैं वे सब ।
दौलत जहां है वहीं है पिपाशा ।।
बजाते हैं हम सब समय की गुलामी।
मेहनत ने घर को बहुत है तराशा ।।
यहां जो भी आए दिए दर्द भारी ।
सबको रुलाए दिए सबको झांसा ।।
अमन चैन की बात करनी थी हमको ।
संघर्ष ही अब बची एक आशा ।।
हम चाहते हैं विचारों का मंथन।
फूले फले सद्विचारों की भाषा ।।
बड़ी गंदगी है बड़ा है तमाशा ।
उधर रोशनी है इधर है निराशा ।।
-अन्वेषी
