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जीवन दर्पण : शनि शांति, कालसर्प दोष व भाग्य ग्रहण दोष की वैदिक पूजा कराएं

-डॉ. बालकृष्ण मिश्र , विद्यावारिधि (पी.एच.डी-काशी)

गुरुजी, मेरी राशि क्या है और क्या मुझ पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है? कोई उपाय बताएं।
-आदित्य भोसले
(जन्म: २६ अक्टूबर २००४, रात्रि २:३५, घाटकोपर ईस्ट, मुंबई)
आदित्य जी, आपका जन्म मंगलवार को उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के तृतीय चरण में हुआ है। राशि मीन है। राशि के अनुसार आप पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव चल रहा है। लग्न सिंह है, जिसके स्वामी सूर्य नीच राशि में केतु के साथ पराक्रम भाव में हैं। भाग्य भाव में राहु होने से भाग्य ग्रहण दोष बन रहा है, जिससे करियर और शिक्षा में अस्थिरता संभव है। वर्तमान में बुध महादशा में शनि का अंतर चल रहा है। शनि षष्ठेश और सप्तमेश होकर द्वादश भाव में है, जो विपरीत राजयोग बनाकर आकस्मिक आय भी देता है। उपाय: शनि शांति, कालसर्प दोष और भाग्य ग्रहण दोष की वैदिक पूजा कराएं। प्रतिदिन हनुमान चालीसा का तीन बार पाठ करें। १०० ग्राम काला तिल, काली उड़द, बादाम, कच्चा कोयला, एक नारियल और आधा मीटर काला कपड़ा सिर से सात बार घुमाकर तालाब में विसर्जित करें।
गुरुजी, मेरी राशि क्या है और मेरा करियर कैसा रहेगा?
-आस्था शिर्के
(जन्म: १ नवंबर २०१२, दोपहर ३:५५, घाटकोपर ईस्ट, मुंबई)
आस्था जी, जन्म गुरुवार, रोहिणी नक्षत्र द्वितीय चरण, राशि वृषभ और लग्न मीन है। लग्नेश बृहस्पति पराक्रम भाव में उच्च चंद्रमा और केतु के साथ है। चंद्रमा पंचमेश होकर उच्च का है, पर केतु के साथ ग्रहण योग से करियर में कन्फ्यूजन संभव है।
बृहस्पति की दृष्टि सप्तम, भाग्य और लाभ भाव पर होने से आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। छठे भाव का स्वामी सूर्य नीच होकर अष्टम में है। शुक्र नीच होकर सप्तम में है, कुंडली मांगलिक नहीं है। उपाय: कालसर्प योग पूजा कराएं, प्रतिदिन सूर्य को अर्घ्य दें।
गुरुजी, मेरे विवाह में विलंब क्यों हो रहा है? कृपया कारण एवं निवारण बताएं।
-आकांक्षा यादव
(जन्म: २६ अप्रैल १९९४, शाम ४:५८, भायंदर, मुंबई)
आकांक्षा जी, आपका जन्म शुक्रवार के दिन हुआ है। ऐसे में आश्लेषा नक्षत्र के प्रथम चरण में आपकी राशि कर्क और लग्न कन्या है। अष्टम भाव में मंगल और उच्च सूर्य होने से अच्छे रिश्ते मिलने में अड़चन और पसंद के रिश्ते में नकारात्मकता आ रही है। वर्तमान में शुक्र महादशा में राहु अंतर चल रहा है। उपाय: अनुकूल विवाह के लिए मंगल चंडिका स्तोत्र पाठ और कुंभ विवाह के बाद ही विवाह में आगे बढ़ें।

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