मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनाअनंत से जुड़ जाएं

अनंत से जुड़ जाएं

हम सभी अनंत के अंश हैं।
चूंकि अंश अपने अंशी से मिलना चाहता है
इसलिए अनंत से जुड़ जाएं।
अनंत की यात्रा आत्मा से
परमात्मा के मिलन की है।
अनंत से जुड़ने पर सुख की
तलाश खत्म हो जाती है ।
अनंत से सभी अलग हुए और
अंत में अनंत में ही समा जाना है।
अनंत अरुप होते हुए भी
महसूस किया जाता है।
अनंत की कोई मूर्ति नहीं,
कोई तस्वीर नहीं ।
अनंत लिखने-पढ़ने और
वर्णन करने का विषय नहीं है।
बल्कि ध्यान की साधना से
अनंत की अनुभूति होती है।
अनंत निराकार होते हुए भी साकार है।
हमारी अंतस चेतना अनंत से
मिलने की चाहत रखती है।
सृष्टि के हरेक तत्व के साथ
हमारा संयोजन है इसलिए
हमारा विलय अंत में
इन्हीं तत्वों में हो जाता है।
सद्गुरु अनंत के ज्ञान का भंडार हैं।
सद्गुरु द्वारा अनंत की यात्रा
सरल और आनंदमय होती है।
-आर.डी. अग्रवाल प्रेमी, मुंबई

अन्य समाचार