-आधी रात में चल रहा सदस्य तोड़ो ऑपरेशन
सामना संवाददाता / मुंबई
जिला परिषद अध्यक्ष चुनाव से पहले सियासी पारा चरम पर है। सत्ता की जंग अब खुलेआम ‘खोका पॉलिटिक्स’ के आरोपों में बदल गई है, जहां खरीद-फरोख्त के खेल ने लोकतंत्र की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी क्रम में शिवसेना नेता अंबादास दानवे ने सत्ताधारियों पर सीधा हमला बोलते हुए दावा किया है कि मध्य रात में ‘सदस्य तोड़ो ऑपरेशन’ चलाया जा रहा है। दानवे ने मंत्री अतुल सावे का नाम लिए बिना उन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एक वोट के लिए ३० करोड़ रुपए के काम का ऑफर दिया गया, जिससे पूरी चुनावी प्रक्रिया पर ही संदेह गहरा गया है।
शिवसेना नेता और विधान परिषद के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे ने सत्तारूढ़ भाजपा और उसके सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के तौर पर सीधे चुनाव न लड़कर केवल सदस्यों को तोड़ने की घिनौनी राजनीति भिवंडी बायपास पर आधी रात को चल रही है। ‘खोके’ की छाया में लेने का ‘अतुलनीय’ प्रयास हो रहा है। ऐसे शब्दों में उन्होंने बिना नाम लिए भाजपा नेता और मंत्री पर निशाना साधा। दानवे ने आरोप लगाया कि जिला परिषद अध्यक्ष बनाने के लिए शिंदे गुट और भाजपा ने शिवसेना व राष्ट्रवादी कांग्रेस के सदस्यों को तोड़ा है। पहले ढाई साल में अध्यक्ष पद किसे देना है, इस पर सहमति न बनने के कारण यह स्थिति बनी है। दोनों पक्ष अपने-अपने सदस्यों और कथित रूप से तोड़े गए सदस्यों को दौरों पर ले गए हैं। चुनाव के समय से पहले उन्हें जिला कलेक्टर कार्यालय में लाया जाएगा।
भाजपा की घिनौनी राजनीति
सत्ताधारियों पर हमला बोलते हुए दानवे ने कहा कि एक तरफ ३० ‘खोके’ का विकास और तीन खोके ज्यादा देकर एक सदस्य पर ‘प्रहार’ किया गया, तो दूसरी तरफ किसी को आश्वासन का लालच देकर यह टोली घूम रही थी। पार्टी के रूप में सामने न आकर केवल सदस्यों को तोड़ना, यही घिनौना तरीका ‘भाड़े की जनता पार्टी’ अपना रही है।
सदन में आरोप
दानवे ने हाल ही में आरोप लगाया था कि मंत्री अतुल सावे ने प्रहार के एक सदस्य को वोट के बदले ३० करोड़ रुपए के काम का प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा कि यह सही है या गलत, मुझे नहीं पता, लेकिन ऐसा कहा जा रहा है कि एक वोट के लिए ३० करोड़ रुपए के काम का पत्र दिया गया।
मंत्री का जवाब
मंत्री अतुल सावे ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि हमारा कोई भी व्यक्ति उनसे नहीं मिला है। हमारी किसी से कोई चर्चा नहीं हुई है। अगर कोई व्यक्ति या अधिकारी उनसे मिला है, तो अंबादास दानवे को उसका नाम बताना चाहिए।
