डॉ. बालकृष्ण मिश्र
काशी के सुप्रसिद्ध ज्योतिर्विद
गुरुजी मेरी शादी हुए कई वर्ष हो गए, अभी तक कोई संतान नहीं हुई है क्या मेरी कुंडली में कोई दोष है, कोई उपाय बताएं? मुकेश शिर्के
(जन्म- १५ मई १९९१, समय- प्रात: ७:५८ बजे, स्थान-अंबरनाथ, ठाणे महाराष्ट्र)
मुकेश जी, आप का जन्म बुधवार के दिन हुआ है। रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में राशि आपकी वृषभ बन रही है। संतान का विचार पंचम भाव से किया जाता है। पंचम भाव का स्वामी बुध है। वह बुध आपकी कुंडली में १२ वें भाव पर बैठा है। पंचम भाव का स्वामी यदि १२ में भाव पर बैठता है तो संतान में विलंब भी होता है और दूसरे स्थान पर छठे भाव का स्वामी शुक्र है इसलिए दवा और दुआ दोनों को आपको स्वीकार करना होगा क्योंकि आपकी कुंडली में कालसर्प योग भी बना हुआ है। कालसर्प योग की भी पूजा करनी होगी। आपको अपनी पत्नी की भी कुंडली को दिखवाना चाहिए क्यों कि पत्नी की कुंडली में संतान के योग की प्रबलता कितनी है। आपकी कुंडली के आधार पर २०२७ में संतान होने के प्रबल योग बन रहे हैं। जीवन के विस्तार को जानने के लिए आपको संपूर्ण जीवन दर्पण गोल्ड बनवाना चाहिए।
गुरुजी मेरा डिवोर्स हो गया, दूसरी शादी कब तक होगी? दूसरी शादी में वैवाहिक सुख मिलेगा कि नहीं, कोई उपाय बताएं?
मनाली कुलकर्णी
(जन्म- ४ अक्टूबर १९९२ समय-रात्रि ११:३०, स्थान-
सांताक्रुज मुंबई)
मनाली जी, आपका जन्म रविवार के दिन हुआ है। उत्तराषाढ़ नक्षत्र के द्वितीय चरण में राशि आपकी मकर बन रही है। कुंडली आपकी मांगलिक है और मांगलिक कुंडली के साथ-साथ आपकी कुंडली में अनंत नामक कालसर्प योग बना हुआ है। इस कालसर्प योग के कारण ही पहले विवाह में पति के साथ में वैचारिक मतभेद के कारण वैवाहिक जीवन ठीक नहीं था, लेकिन विवाह निश्चित होने से पहले आपको कालसर्प योग की पूजा जरूर करवानी चाहिए क्योंकि महादशा के आधार पर अगर हम देख रहे हैं तो इस समय राहु की महादशा में केतु का अंतर समाप्त हो गया है। जल्द ही २०२६ जून के बाद ही कोई अच्छा सा रिश्ता मिलेगा आपको और उसी के साथ में विवाह सुख मय हो जाएगा। जीवन की गहराई को जानने के लिए आपको संपूर्ण जीवन दर्पण गोल्ड बनवाना चाहिए।
गुरुजी मेरा करियर कैसा रहेगा और जीवन में विकास का मार्ग कैसे खुलेगा, कृपया बताएं?
मुकेश भाकर
(जन्म- १३ अक्टूबर १९९६, समय रात्रि ३:४५ बजे, स्थान-अंधेरी- पश्चिम, मुंबई)
मुकेश जी, आपका जन्म रविवार के दिन हुआ है। चित्रा नक्षत्र की तृतीय चरण में राशि आपकी तुला बन रही है। लग्न के आधार पर अगर हम देख रहे हैं तो सिंह लग्न में आपका जन्म हुआ है। आपकी कुंडली में अगर हम देख रहे हैं तो कुलिक नामक कालसर्प योग भी बन रहा है। इस कुलिक नामक कालसर्प योग के कारण चिड़चिड़ापन तथा परिश्रम का पूरी तरह से फल प्राप्त नहीं हो रहा है। इसलिए आपकी कुंडली को अगर हम देख रहे हैं तो मंगल ग्रह भाग्य भाव का स्वामी है, जो नीच राशि का हो करके १२ वें भाव पर बैठा हुआ है और १२ वें भाव पर बैठकर के अपने पूर्ण दृष्टि से पराक्रम भाव को देख रहा है। आप अपने किसी भी कार्य को करने के लिए बार-बार प्रयास करते हैं तो सफलता निश्चित मिल जाती है। लेकिन कुलिक नामक कालसर्प योग की वैदिक पूजा भी आपको करनी चाहिए यदि महादशा के आधार पर हम देख रहे हैं तो गुरु की महादशा में बुध का अंतर चल रहा है। यदि जीवन के विस्तार को आपको जानना है तो संपूर्ण जीवन दर्पण गोल्ड बनवाना चाहिए।
