रामदिनेश यादव / मुंबई
ईरान-इजरायल युद्ध के चलते गैस सिलिंडर की संभावित कमी को लेकर महाराष्ट्र की भाजपा-महायुति सरकार पूरी तरह घिरी नजर आ रही है। हालात ऐसे बन गए हैं कि अब सरकार को एलपीजी सिलिंडरों की सुरक्षा के लिए कमांडो जैसी सख्त व्यवस्था और वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को मैदान में उतारना पड़ रहा है। विपक्ष ने इसे सरकार की विफलता बताते हुए तीखा हमला बोला है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि आनेवाले दिनों में गैस की किल्लत के चलते कालाबाजारी और बढ़ सकती है। यह मुद्दा सीधे आम जनता की रसोई से जुड़ा होने के कारण भाजपा-महायुति सरकार के लिए बहुत बड़ा राजनीतिक संकट बन सकता है। राज्य सरकार ने जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि गैस सिलिंडर की आपूर्ति, भंडारण और वितरण पर कड़ी निगरानी रखी जाए। इसके लिए जिलास्तर पर विशेष समितियां बनाई जा रही हैं, जिनमें जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, जिला आपूर्ति अधिकारी और सरकारी गैस कंपनियों के अधिकारी शामिल रहेंगे। इन समितियों को रोजाना स्थिति की समीक्षा कर रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, कई जगह सिलिंडर की कालाबाजारी और चोरी करनेवाले गिरोह सक्रिय होने की आशंका जताई गई है। इसी कारण गैस गोदामों और वितरण केंद्रों पर पुलिस की विशेष निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। विपक्ष का आरोप है कि अगर सरकार की व्यवस्था मजबूत होती तो आज सिलिंडर की सुरक्षा के लिए ‘कमांडो’ तैनात करने की नौबत ही नहीं आती।
विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया है कि क्या राज्य की कानून-व्यवस्था इतनी कमजोर हो गई है कि अब रसोई गैस की सुरक्षा के लिए भी युद्धस्तर की व्यवस्था करनी पड़ रही है? उनका कहना है कि सरकार अंतर्राष्ट्रीय हालात का हवाला देकर अपनी प्रशासनिक नाकामी छिपाने की कोशिश कर रही है।
