मुख्यपृष्ठखबरेंमैडम जी, जुबान संभालकर, हर विरोधी देशद्रोही नहीं होता

मैडम जी, जुबान संभालकर, हर विरोधी देशद्रोही नहीं होता

-कंगना रनौत के बयान पर सोशल मीडिया में भड़का गुस्सा
-यूजर्स बोले, बहुत ज्यादा बोल रही हो
अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत एक बार फिर अपने बयान को लेकर सोशल मीडिया के निशाने पर हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर प्रदर्शन को कथित तौर पर देशविरोधी ताकतों से जोड़ने पर सोशल मीडिया यूजर्स ने कंगना को जमकर घेरा है। लोगों का सवाल है कि सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करना आखिर कब से देशद्रोह हो गया? दरअसल, कंगना रनौत ने कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की निंदा की है। कंगना ने प्रदर्शनकारियों को ‘एंटी नेशनल ताकतें’ कहा है, जो भारत को अस्थिर करने की कोशिश कर रही हैं। कंगना रनौत ने १० अक्टूबर को लखनऊ में पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा कि आम लोग अब उन लोगों को समझने और सवाल उठाने लगे हैं, जो इस आंदोलन के पीछे हैं। मालूम हो कि यह विरोध प्रदर्शन चुनाव प्रक्रिया में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की भूमिका और उसमें गड़बड़ियों पर सवाल उठाते हुए किया गया था।
‘हर विरोध में देशद्रोह क्यों दिखता है?’
कंगना के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कई यूजर्स ने उन्हें नसीहत दी कि सार्वजनिक जीवन में बयान देने से पहले शब्दों की जिम्मेदारी समझनी चाहिए। लोगों ने सवाल उठाया कि यदि किसी प्रदर्शनकारी के खिलाफ देशविरोधी गतिविधि के ठोस सबूत हैं, तो उन्हें सामने लाया जाए, लेकिन महज विरोध या असहमति को देशविरोधी ताकतों से जोड़ना लोकतांत्रिक अधिकारों पर सवाल खड़े करता है।
सवाल पूछना अपराध नहीं
सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करना नागरिक का अधिकार है। सरकार के फैसलों पर सवाल उठाने वालों को राष्ट्रविरोधी बताने की राजनीति अब लोगों को रास नहीं आ रही है। कई यूजर्स ने कंगना को ट्रोल करते हुए लिखा कि देशभक्ति का प्रमाणपत्र बांटने का अधिकार किसी सांसद या अभिनेत्री को नहीं मिला है। कंगना जी, कैमरे के सामने बयान देना आसान है, लेकिन लोकतंत्र में उठ रहे सवालों का जवाब देना ज्यादा जरूरी है। असहमति को देशद्रोह बताने से आवाजें बंद नहीं होंगी। मैडम जी, जुबान संभालकर!

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