सामना संवाददाता / मुंबई
नियम ९३ के तहत विधान परिषद में कल मराठी भाषा के मुद्दे पर महायुति सरकार घिरती नजर आई। लंदन में मराठी के वैश्विक केंद्र के लिए केवल ५ करोड़ रुपए देने के पैâसले पर विपक्ष ने सरकार को आड़े हाथों लिया और तीखे सवाल दागे। सदन में कहा गया कि लंदन जैसे महंगे शहर में इतनी रकम में तो जमीन का छोटा टुकड़ा भी मुश्किल से मिलेगा। ऐसे में मराठी का वैश्विक भाषा केंद्र बनाने का दावा वैâसे पूरा होगा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि मराठी को अभिजात दर्जा मिलने के बाद भी सरकार ठोस योजना और पर्याप्त निवेश के बजाय केवल घोषणाओं तक सीमित है, जबकि मराठी भाषा के वैश्विक प्रचार के लिए गंभीर और मजबूत पहल की जरूरत है।
विधान परिषद में नियम ९३ के तहत मराठी भाषा के मुद्दे पर हुई चर्चा के दौरान लंदन में प्रस्तावित मराठी वैश्विक भाषा केंद्र को लेकर महायुति सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई। चर्चा के दौरान कांग्रेसी सदस्य भाई जगताप ने कहा कि मराठी भाषा को अभिजात दर्जा मिलना केंद्र सरकार, मुख्यमंत्री और सभी जनप्रतिनिधियों को बधाई दी गई थी। लेकिन डेढ़ साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी सरकार की कार्रवाई अपेक्षित गति से आगे बढ़ती दिखाई नहीं देती। उन्होंने कहा कि मराठी भाषा के अध्ययन, शोध और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए मराठी भाषा भवन की घोषणा की गई थी, लेकिन अब तक उसके निर्माण की स्पष्ट समय सीमा सामने नहीं आई। सदन में सवाल उठाया गया कि सरकार यह बताए कि आखिर यह भवन कितने महीनों में तैयार होगा और तब तक राज्य सरकार स्वयं क्या कदम उठाएगी।
लंदन में मराठी केंद्र बना मुद्दा
बहस का सबसे बड़ा मुद्दा लंदन में बनने वाले मराठी वैश्विक भाषा केंद्र पर रहा। भाई जगताप ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने इस परियोजना के लिए केवल ५ करोड़ रुपए यानी लगभग ५,४३,८४७.५० डॉलर देने की बात कही है। लंदन जैसे महंगे शहर में इतनी छोटी राशि से वैश्विक भाषा केंद्र बनाना वैâसे संभव होगा, यह बड़ा सवाल है। अन्य सदस्यों ने भी सदन में कहा कि अगर सरकार सच में मराठी भाषा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना चाहती है तो केवल प्रतीकात्मक घोषणाओं से काम नहीं चलेगा। इसके लिए ठोस योजना, स्पष्ट रोडमैप और पर्याप्त निवेश जरूरी है।
सरकार ने पूरी तरह चुकाई राशि
सरकार की ओर से जवाब देते हुए मंत्री उदय सामंत ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम से लंदन में दुनिया का पहला मातृभाषा आधारित वैश्विक भाषा केंद्र स्थापित किया जा रहा है। इसके लिए महाराष्ट्र मंडल को ५ करोड़ रुपए की सहायता दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस भवन में यह केंद्र स्थापित होगा, उसकी खरीद के लिए आवश्यक राशि राज्य सरकार ने पूरी तरह चुकाई है। मंत्री ने दावा किया कि मराठी भाषा के संवर्धन के लिए सरकार कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। मराठी भाषा भवन, ऐरोली में उपकेंद्र और लंदन में वैश्विक भाषा केंद्र ये तीनों परियोजनाएं इसी दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
खड़े हुए बड़े सवाल
हालांकि, विपक्षी सदस्यों ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर मराठी भाषा को सच में वैश्विक मंच पर स्थापित करना है तो ५ करोड़ रुपए का निवेश पर्याप्त नहीं है। सदन में उठी इस बहस ने मराठी भाषा के अंतरराष्ट्रीय प्रचार को लेकर सरकार की नीति और गंभीरता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
कामकाजी आबादी का बड़ा आधार
राज्य की ६७.३ प्रतिशत आबादी १५-५९ आयु वर्ग में है।
इसे ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ यानी आर्थिक अवसर माना जाता है।
सही नीति से यह आबादी विकास की ताकत बन सकती है।
