विधानपरिषद में लापरवाही का हुआ खुलासा
एमपीसीबी तक पहुंचीं शिकायतों ने खोली पोल
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
महायुति सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जहां मुंबई मनपा के प्रमुख अस्पताल में शामिल केईएम, नायर और कूपर में ‘बायो वेस्ट बम’ जैसे हालात उजागर हुए हैं। विधानपरिषद में शिवसेना द्वारा उठाए गए इस मुद्दे ने साफ कर दिया है कि जैव-चिकित्सकीय कचरे के निपटान में बड़ी लापरवाही बरती जा रही है। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल तक पहुंची शिकायतों ने सिस्टम की पोल खोल दी, जिसके बाद सरकार को भी सदन में गड़बड़ियां माननी पड़ीं और निर्देशों की भरमार करनी पड़ी। इतना ही नहीं पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे ने यह भी माना कि अस्पतालों में पुरानी मशीनें, सीमित क्षमता और अधूरी व्यवस्थाएं हैं। अब भी मरीजों की सुरक्षा पर खतरा बनकर मंडरा रही हैं।
मुंबई महानगरपालिका के प्रमुख अस्पताल केईएम, नायर और कूपर में जैव-चिकित्सकीय कचरे के निपटान को लेकर गंभीर लापरवाही का मामला अब विधानपरिषद तक पहुंच गया है। तारांकित प्रश्न के जरिए उठे इस मुद्दे ने साफ कर दिया है कि अस्पतालों में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त नहीं है और इसी कारण महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल तक शिकायतें पहुंचीं। प्रश्नकर्ता शिवसेना सदस्य मिलिंद नार्वेकर ने सरकार से सीधे पूछा कि क्या इन अस्पतालों में जैव कचरे का सही तरीके से निपटान नहीं हो रहा और यदि शिकायतें मिली हैं तो जांच में क्या सामने आया। इसके जवाब में पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे ने स्वीकार किया कि यह मामला आंशिक रूप से सही है और सितंबर २०२५ में इस संबंध में शिकायतें प्राप्त हुई थीं। सरकार के अनुसार, कूपर, केईएम और नायर अस्पतालों में कचरा प्रबंधन को लेकर खामियों की खबरें सामने आई थीं। इसके बाद संबंधित अस्पतालों को ३० सितंबर २०२५, २० अक्टूबर २०२५ और ७ अगस्त २०२५ को निर्देश जारी किए गए, जबकि २७ फरवरी २०२६ को अंतरिम निर्देश भी दिए गए।
सही तरीके से नहीं हो रहा पृथक्करण
हालांकि, जमीनी स्थिति अब भी कई सवाल खड़े कर रही है। निरीक्षण में सामने आया कि कुछ जगहों पर कचरे का सही से पृथक्करण नहीं हो रहा है, जबकि कूपर अस्पताल में मौजूद एसटीपी और ईटीपी प्लांट पुराने और कम क्षमता वाले हैं। उन्हें आधुनिक बनाने के लिए बजट की कमी आड़े आ रही है। नायर अस्पताल में नई क्षमता बढ़ाने की योजना है, जबकि केईएम में व्यवस्था अपेक्षाकृत बेहतर बताई जा रही है।
