-फडणवीस ने किया बचाव, कोई गलत बात नहीं
सामना संवाददाता / मुंबई
मनपा की नई महापौर रितु तावड़े की सरकारी गाड़ी पर लगी लाल और नीली बत्ती को लेकर सियासत गरमा गई है। २०१७ में केंद्र सरकार द्वारा वीआईपी कल्चर खत्म करने के लिए लाल बत्ती पर रोक लगाने का पैâसला किया गया था, लेकिन अब मुंबई में भाजपा की सत्ता आते ही उसी नियम को दरकिनार करने के आरोप लगने लगे हैं। इस मुद्दे पर विपक्ष आक्रामक हो गया है। हालांकि, इस मामले में सीएम फडणवीस महापौर को क्लीन चिट देते नजर आ रहे हैं।
दरअसल, हाल ही में महापौर रितु तावड़े के लिए नई आधिकारिक कार दी गई है। इस कार के सामने वाले हिस्से पर लाल और नीले रंग की बत्ती लगाए जाने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। इसके बाद विपक्ष और जनता ने सवाल उठाया कि जब पूरे देश में लाल बत्ती संस्कृति खत्म करने की बात भाजपा द्वारा कही गई थी तो फिर मुंबई में यह नियम क्यों तोड़ा जा रहा है? इस विवाद के बीच राज्य के मुख्यमंत्री ने महापौर का बचाव करते हुए कहा कि गाड़ी के ऊपर लाल बत्ती नहीं थी, बल्कि बोनट के पास लाइट लगी थी। इसमें महापौर की कोई गलती नहीं है और उन्हें बेवजह टार्गेट किया जा रहा है। हालांकि, मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद विवाद और गहरा गया है। पूरे प्रकरण ने मुंबई की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।
विपक्ष का आरोप है कि जब देशभर में वीआईपी कल्चर खत्म करने का दावा किया गया था, तब भाजपा की सत्ता आते ही नियमों को ही मोड़ दिया जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि अगर लाल बत्ती पर प्रतिबंध है तो फिर उसे किसी भी रूप में गाड़ी पर लगाने की अनुमति वैâसे दी गई? आलोचकों का कहना है कि भाजपा लंबे समय से सादगी और वीआईपी संस्कृति खत्म करने की बात करती रही है, लेकिन मुंबई महानगरपालिका में सत्ता मिलते ही वही पुरानी विशेषाधिकार संस्कृति लौटती दिखाई दे रही है।
