द्रुप्ति झा / मुंबई
मुंबई का (एक्वा लाइन-३) अंडरग्राउंड मेट्रो में मोबाइल नेटवर्क न होना यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। स्टेशन और सुरंगों में सिग्नल पूरी तरह गायब होने से कॉल, इंटरनेट और यूपीआई पेमेंट ठप हो जाते हैं, जिससे यात्री डिजिटल डिटॉक्स होने के लिए मजबूर हैं। आपातकालीन स्थिति में कॉल न कर पाना यात्रियों के लिए एक बड़ा सुरक्षा जोखिम है, जिसको लेकर आज भी यात्रियों की कई शिकायतें हैं।
महिला यात्री प्रियंका सोनी ने अपना खराब अनुभव सामना संवाददाता से साझा किया। उन्होंने कहा कि मैं अंडरग्राउंड मेट्रो से विधान भवन की ओर अपने दफ्तर जा रही थी, तभी अचानक मेरे बॉस का कॉल आया और मेरे बॉस ने एक अर्जेंट कॉल मेरे क्लाइंट को करने के लिए कहा। मैं अंडरग्राउंड मेट्रो में कॉल कनेक्ट नहीं कर पाने के कारण मुझे बॉस से बड़ी फटकार मिली और जॉब छोड़ने को कह दिया। मुंबई जैसे शहर में दौड़ भाग की जिंदगी में लोगों के पास काम इतना बढ़ चुका है कि लोग अपने कामों का किसी भी तरीके से निपटारा अपने सफर के दरमियान करने की कोशिश करते हैं, लेकिन अंडरग्राउंड मेट्रो के सफर ने तो यात्रियों को अंडरग्राउंड मेट्रो के अंदर किसी भी काम करने योग्य ही नहीं छोड़ा है। वजह खराब नेटवर्क सिस्टम जहां पर प्रवेश करते ही आपके फोन के नेटवर्क गायब हो जाते हैं और चाहकर भी किसी भी तरफ के पर्सनल या कोई प्रोफेशनल कामों को नहीं कर सकते हैं। मेट्रो के उद्घाटन के बाद से ही लगातार फोन से नेटवर्क गायब हो जाने की शिकायतें लाखों यात्रियों की ओर से मिल चुकी हैं, इसके बावजूद मेट्रो प्रशासन ने यात्रियों के बारे में सोचते हुए कोई ठोस कदम अभी तक नहीं उठाया है। सुरंगों और स्टेशनों में मोबाइल टावर न होने से यात्री बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट जाते हैं।
