सामना संवाददाता / नई दिल्ली
इन दिनों देशभर में एलपीजी गैस का संकट चरम पर है। लोगों के लिए खाना बनाना और खाना ये दोनों ही एक जटिल समस्या बनती जा रही है। आम लोगों के सामने `खाना वैâसे पकाएं और क्या खाएं’ ये समस्याएं पैदा हो रही हैं। जनता पहले ही अमेरिका-इजरायल और ईरान के भीषण वॉर के चलते सिलिंडर संकट का सामना कर रही है वहीं दूसरी ओर अब महंगाई की मार से भी उसे जूझना पड़ रहा है। सिलिंडर के साथ-साथ रोजमर्रा की जरूरी चीजों के दाम भी सातवें आसमान पर पहुंच चुके हैं। मोदी राज में `महंगाई का महाब्लास्ट’ हो गया है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि बढ़ती महंगाई के चलते अब लोगों की जेबें ढीली हो गई हैं और टेंशन भारी हो चुका है।
बता दें कि रसोई गैस (एलपीजी) सिलिंडर की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ-साथ कई जरूरी वस्तुओं के दाम भी तेजी से बढ़ रहे हैं। इसका सीधा असर आम लोगों के घरेलू बजट पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर आने वाले दिनों में खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। व्यापारियों का कहना है कि अगर र्इंधन की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। इससे मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोगों की जेब पर सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका है।
फल-सब्जियों के दामों में भी दिखी तेजी
सब्जियों और फलों की कीमतों में भी तेज उछाल दर्ज किया गया है। बेमौसम बरसात और परिवहन लागत बढ़ने के कारण मंडियों में सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। टमाटर, प्याज और आलू की कीमतों में पिछले कुछ हफ्तों के दौरान काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है। वहीं हरी सब्जियां सामान्य कीमतों की तुलना में २० से ३० प्रतिशत तक महंगी बिक रही हैं।
किचन की `कढ़ाई’ तक पहुंचा मिडल ईस्ट युद्ध का असर
मिडल ईस्ट युद्ध का असर अब रसोई तक पहुंच गया है। एक हफ्ते में खाद्य तेलों की कीमत १ से ४ रुपए प्रति लीटर तक बढ़ गई है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के मुताबिक, सबसे ज्यादा सनफ्लावर ऑयल (१७५ रुपए से बढ़कर १७९ रुपए प्रति लीटर) महंगा हुआ है जबकि मूंगफली तेल १९७ रुपए, पाम ऑयल १३८ रुपए और सरसों तेल १८६.५ रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गया।
