– मोदी सरकार की द्वेष भावना से फिर उठा पर्दा
-कोर्ट ने की जांच अधिकारी पर कार्रवाई की सिफारिश‘
सामना संवाददाता / मुंबई
केंद्र की मोदी सरकार पर अरसे से आरोप लगते रहे हैं कि वह विपक्ष को दबाने के लिए अपनी जांच एजेंसियां ईडी और सीबीआई का दुरुपयोग करती है। कल दिल्ली के एक कोर्ट ने इस आरोप को सही साबित कर दिया। शराब घोटाले का आरोप लगाकर ईडी और सीबीआई ने दिल्ली का मुख्यमंत्री रहते हुए जिन अरविंद केजरीवाल और उप मुख्यमंत्री रहते मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया था, कल दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने दोनों को निर्दोष बताते हुए बरी कर दिया। ऐसे में आम लोगों में केंद्र सरकार और उसकी जांच एजेंसियों के प्रति काफी आक्रोश नजर आ रहा है। इस बारे में मुंबईकरों का कहना है कि जिस तरह से सिसोदिया और केजरीवाल बरी हुए हैं, उसी तरह से बाकी सब भी निर्दोष छूटेंगे।
सिर्फ सत्ता के लिए भाजपा बोलती है ‘सफेद झूठ’!
आप (आम आदमी पार्टी) नेता अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की निर्दोष रिहाई का स्वागत करते हुए मुंबईकरों ने केंद्र सरकार पर जमकर आक्रोश व्यक्त किया है। ‘आप’ (आम आदमी पार्टी) की प्रदेश अध्यक्ष प्रीति शर्मा मेनन ने कोर्ट के निर्णय पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि भाजपा सरकार की ओर से दिल्ली की सत्ता हथियाने के लिए ‘आप’ नेताओं को भ्रष्टाचार में लिप्त होने का झूठ पैâलाया गया। दिल्ली के पूर्व सीएम केजरीवाल और वरिष्ठ मंत्री सिसोदिया की शराब नीति को घोटाला बताकरकई लोगों को फंसाया गया और यह सब झूठ सिर्फ और सिर्फ दिल्ली की सत्ता हथियाने के लिए भाजपा ने किया। भाजपा ने दावा किया था कि उनके पास सारे सबूत हैं, लेकिन यह सब झूठ था। उनके पास कोई सबूत नहीं था। उनकी दलील को कोर्ट ने नकार दिया। कोर्ट ने यहां तक कह दिया कि जो शराब पॉलिसी थी, वह सही तरीके से बनी थी। उसमें कोई गलती नहीं थी और कहीं घोटाला नजर नहीं आता है। मनीष सिसोदिया और अन्य लोगों के घर जो छापे मारे गए, वहां एक लाख रुपया भी बरामद नहीं हो पाया।
‘आप’ की मुंबई पदाधिकारी एड. सुमित्रा श्रीवास्तव ने कहा कि हिंदुस्थान की राजनीति में केजरीवाल और पार्टी के सभी नेता ईमानदार हैं। यह आज माननीय कोर्ट ने सिद्ध कर दिया है और भाजपा मुंह के बल गिरी है। व्यावसायी महेश दोशी ने कहा कि आज सत्य की जीत हुई। आज बाबासाहेब के बनाए संविधान व न्याय पालिका पर एक बार फिर भरोसा कायम रहा। मुंबईकर गोपाल झवेरी ने कहा कि दिल्ली शराब नीति प्रकरण में सीबीआई और ईडी द्वारा की गई गिरफ्तारी तथा बाद में कोर्ट द्वारा उन्हें रिहा किए जाने से जांच एजेंसियों के दुरुपयोग को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। रिक्शा चालक विनोद दुबे ने कहा कि आज केजरीवाल और सिसोदिया को लेकर जो कोर्ट का पैâसला आया है, उससे यह पुन: सिद्ध होता है कि डॉ. आंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान आज भी सशक्त है और लोकतांत्रिक सिद्धांतों की रक्षा कर रहा है। साथ ही यह भी स्मरण कराता है कि महात्मा गांधी से प्रेरित सत्य और नैतिक मूल्यों की अंतत: विजय होती है। वरिष्ठ नागरिक नंदलाल पांडेय ने कहा कि कोर्ट ने जो पैâसला दिया है, उससे आशा है कि भविष्य में जांच एजेंसियों का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग नहीं होगा और सरकारें जनता के विकास तथा कल्याण के लिए ईमानदारी से कार्य करेंगी।
विपक्ष को खत्म करने की साजिश
लोकसभा चुनाव के ठीक पहले सिसोदिया और फिर केजरीवाल को गिरफ्तार किया गया था। बताया जाता है कि ये दोनों गुजरात में भाजपा का खेल खराब कर सकते थे इसलिए उनके ऊपर शराब घोटाले के फर्जी केस डाले गए। इसके पहले कांग्रेस को कंट्रोल करने के लिए कार्ति चिदंबरम और पी. चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया से जुड़े मनी लॉड्रिंग के मामले में लपेटा गया था। इसी कड़ी में कर्नाटक के मजबूत नेता डीके शिवकुमार पर जमीन घोटाले का आरोप लगाकर गिरफ्तार किया गया था। पश्चिम बंगाल में टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी पर भी फर्जी कोयला घोटाले का आरोप लगाकर केस दर्ज किया गया। शिवसेना नेता व सांसद संजय राऊत पर भी मनी लॉन्ड्रिंग का झूठा आरोप लगाया गया था। लोकसभा चुनाव के ठीक पहले झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन को भी लैंड स्वैâम व मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। पिछले साल कर्नाटक में एचडी कुमारस्वामी के खिलाफ भी लैंड स्वैâम में केस दर्ज किया गया था। विपक्ष को कुचलने के लिए ये सभी मामले फर्जी तरीके से बनाए गए थे।
विपक्षी नेताओं पर दर्ज मामले
१. कार्ति चिदंबरम : २०१७
२. पी. चिदंबरम : २०१८
३. डीके शिवकुमार : २०१८
४. अभिषेक बनर्जी : २०२१
३. संजय राऊत : २०२२
४. अरविंद केजरीवाल : २०२३
५. मनीष सिसोदिया : २०२३
८. हेमंत सोरेन : २०२४
९.एचडी कुमारस्वामी : २०२५
