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मुस्लिम वर्ल्ड : बमों और मिसाइलों के बीच,  चुना नया सुप्रीम लीडर…ईरान ने कर दिखाया!

सूफी खान

सोशल मीडिया और खबरों में इस बात की चर्चा हो रही है कि अमेरिका -इजरायल के साथ चल रही जंग के बीच ईरान ने अपने नए सुप्रीम लीडर का चुनाव कर लिया है। ईरान की ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ यानी मजलिस ए खोब्रागान ने अयातुल्लाह सैय्यद अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर चुन लिया है। वेस्टर्न मीडिया में इसको लेकर खबरें आने लगी हैं, लेकिन ईरान की तरफ से इसका बाजाप्ता यानी ऑफिशयल एलान होना बाकी है।
ईरान में हो रहे इजरायल-अमेरिका के जबरदस्त हमलों और ईरान की तरफ से भयानक पलटवार के बीच ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट ने इस मुश्किल चैलेंज को पूरा कर दिया है। अयातुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु के बाद ईरान को एक ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो अमेरिका -इजरायल की किसी भी साजिश को नाकाम कर सके। इमाम खामेनेई की शहादत से बना नेतृत्व का एक बड़ा शून्य तुरंत भरना जरूरी था। मीडिया आउटलेट्स की रिपोर्ट के अनुसार, ८८ आला दर्जे के मौलवियों वाली इस सभा ने ५६ साल के मोजतबा खामेनेई को ईरान की कमान सौंपने का फैसला लिया है। सूत्रों का दावा है कि मोजतबा खामेनेई के चुनाव के पीछे ईरान के शक्तिशाली ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ का भारी दबाव रहा है। ईरान की सेना और आईआरजीसी ने युद्ध और संकट के इस समय में मोजतबा को सत्ता के लिए सबसे सही और सुरक्षित विकल्प माना है।
मीडिया रिपोर्ट बता रही हैं कि आयतुल्लाह खामेनई के बेटे मोजतबा खामेनेई के नाम पर पूरी तरह सहमति बन गई है, पर ऐलान का इंतजार है। हालांकि, कहा जाता है कि सैय्यद अयातुल्लाह अली खामेनई खुद नहीं चाहते थे कि उनके बाद उनके परिवार से कोई जिम्मेदारी संभाले क्यों कि १९७९ की ईरानी क्रांति राजशाही के खिलाफ ही हुई थी। इस्लामिक रिपब्लिक के सिद्धांतों में पिता के बाद बेटे को सत्ता सौंपना सही नहीं माना जाता। यही वजह है कि अयातुल्लाह खुमैनी के बेटे को सत्ता नहीं दी गई बल्कि उनके सबसे भरोमंद सिपहसालार अयातुल्लाह खामनेई ने उनके बाद ये जिम्मेदारी निभाई। लेकिन ताजा हालात में मोजतबा खामेनेई हर लिहाज से सुप्रीम लीडर के ओहदे के लिए सही माने जा रहे हैं। मोजतबा अयातुल्ला खामेनेई के दूसरे बेटे हैं। उन्होंने कभी भी कोई औपचारिक सरकारी पद नहीं संभाला, लेकिन उन्हें अपने पिता के ऑफिस में एक बेहद प्रभावशाली रणनीतिकार माना जाता है। उन्होंने १९८० के दशक में ईरान-इराक युद्ध में हिस्सा लिया था। हालांकि ईरान से इस संबध में कोई आधिकारिक रिपोर्ट नहीं आई है कि मोजतबा खामेनेई ही देश के सुप्रीम लीडर होंगे, लेकिन एक्सपर्ट कहते हैं कि जंग के हालात में अभी ईरान ने इस बात को छिपा कर रखा होगा, जबकि सुप्रीम लीडर चुनने की कवायद आनन-फानन में अंजाम दे दी गई होगी।

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