मुख्यपृष्ठखबरेंगोकुल चुनाव में मविआ का डंका, महायुति की करारी शिकस्त!

गोकुल चुनाव में मविआ का डंका, महायुति की करारी शिकस्त!

सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में सत्ताधारी महायुति के नेताओं की राजनीतिक अकड़ को कोल्हापुर के गोकुल दूध संघ के चुनाव ने करारा झटका दिया है। सभी २५ सीटों पर जीत का दावा करने वाले भाजपा और महायुति के दिग्गज नेता मतदाताओं का रुख भांपने में नाकाम रहे। मविआ की ओर से कांग्रेस नेता सतेज पाटील के नेतृत्व वाली राजर्षि शाहू शेतकरी समविचारी आघाड़ी ने महायुति को पछाड़ते हुए भारी बहुमत हासिल किया। इतना ही नहीं, इन नतीजों ने सत्ता के दम पर चुनाव जीतने का भरोसा जताने वाले नेताओं के दावों की हवा निकाल दी है। मंत्री चंद्रकांत पाटील, हसन मुश्रीफ और जयकुमार गोरे जैसे दिग्गज नेताओं को झटका लगा है। महायुति के कई नामी चेहरे भी इस चुनाव में हार गए हैं।
गोकुल दूध संघ का चुनाव केवल सहकारी संस्था की सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति में प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया था। महायुति की ओर से मंत्री चंद्रकांत पाटील, सांसद धनंजय महाडिक और मंत्री प्रकाश आबिटकर सहित कई नेताओं ने सभी २५ सीटें जीतने का दावा किया था। लेकिन चुनाव परिणामों ने इन नेताओं के राजनीतिक आकलन को गलत साबित कर दिया। सतेज पाटील की रणनीति और उनके पैनल को मिले समर्थन ने महायुति के विजय अभियान और कई दिग्गजों के दावों पर पानी फेर दिया। इस चुनाव में महायुति को एक और बड़ा झटका तब लगा, जब गोकुल के निवर्तमान अध्यक्ष और मंत्री हसन मुश्रीफ के बेटे नाविद मुश्रीफ को हार का सामना करना पड़ा।

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