स्टिंग ऑपरेशन में हुआ खुलासा
सामना संवाददाता / मुंबई
खाड़ी देशों में शुरू युद्ध के चलते ईंधन आपूर्ति पर काफी प्रभाव पड़ा है। गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। व्यावसायिक गैस के साथ-साथ घरेलू गैस सिलेंडर का भी संकट गहराता जा रहा है। कई जिलों में लोग केवल एक घरेलू गैस सिलेंडर पाने के लिए घंटों तक भीषण गर्मी में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों में खड़े दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में कालाबाजारी तेज हो गई है। कई गैस एजेंसी वाले हर सिलेंडर के पीछे अतिरिक्त रुपए वसूल रहे हैं।
महाराष्ट्र के बीड शहर में एक स्टिंग ऑपरेशन में यह खुलासा हुआ है कि गैस एजेंसी से जुड़े डिलिवरी कर्मचारी खुलेआम सिलेंडरों की कालाबाजारी कर रहे हैं। आम उपभोक्ता को २५ दिनों के भीतर बिना बुकिंग और ओटीपी के एक भी सिलेंडर नहीं दिया जाता, लेकिन यदि कोई व्यक्ति २०० रुपए अतिरिक्त दे तो उसे तुरंत सिलेंडर उपलब्ध करा दिया जाता है। यह पूरा खेल एजेंसी के कर्मचारियों की मिलीभगत से चल रहा है। यह मामला सामने आने के बाद सरकार की कालाबाजारी के प्रति कार्रवाई की पोल खुल गई है। सरकार कालाबाजारी पर अंकुश लगाने में फेल नजर आ रही है। स्टिंग ऑपरेशन के दौरान गैस एजेंसी कर्मचारी से हुई बातचीत में यह साफ सामने आया कि फर्जी नाम और पहले से तैयार ओटीपी के जरिए सिलेंडर दिया जा रहा था। कर्मचारी ने खुद रिपोर्टर से कहा कि २०० रुपए दे दो, नाम याद रखो और वही बताना, फिर तुरंत सिलेंडर मिल जाएगा। यह खुलासा न केवल व्यवस्था की पोल खोलता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि वैâसे आम लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर अवैध कमाई की जा रही है।
इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने दावा किया है कि जिले में गैस की कोई कमी नहीं है और नागरिकों को घबराने की जरूरत नहीं है। जिलाधिकारी विवेक जॉन्सन ने गैस वितरकों की बैठक लेकर एजेंसियों को टोल-प्रâी नंबर और दर सूची लगाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि घरेलू गैस का इस्तेमाल व्यावसायिक कामों में किया गया या अधिक कीमत पर बिक्री की गई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। सवाल यह है कि यदि वास्तव में गैस की कोई कमी नहीं है तो फिर देश के कई हिस्सों में लोग सिलेंडर के लिए घंटों लाइन में क्यों खड़े हैं? और अगर कालाबाजारी खुलेआम हो रही है तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है? सरकार की ओर से कार्रवाई के नाम पर झूठा आश्वासन मिल रहा है।
