नव संवत्सर

नव संवत्सर का शुभ आगमन,
लेकर आया पावन प्रकाश,
संस्कारों की मधुर सुगंध संग
जागृत हो जीवन का विश्वास।
प्रार्थना यही है परमेश्वर से
भर दें अंतर्मन में नव उजास,
बनकर ज्योति पुंज हृदय में,
हर लें अज्ञान का संपूर्ण नाश।
स्वयं को पहले हम पहचानें,
फिर जग का करें विचार,
दूजों पर उंगली उठाने से पहले
देखें अपने ही व्यवहार।
त्याग दें प्रतिशोध की भावना,
क्षमा को दें जीवन में स्थान,
दोषों का करें स्वयं निवारण,
यही है सच्चा आत्मज्ञान।
सकारात्मकता का दीप जलाकर
करें समाज का पथ प्रशस्त,
सेवा, करुणा, प्रेम के संग
जीवन हो पूर्णत: सुसज्जित।
आत्मनिरीक्षण को बनाकर ध्येय
आगे बढ़े हर एक इंसान,
जग कल्याण की भावना लेकर
रचें नवयुग, नव निर्माण।
जब अंतर्मन होगा प्रकाशित,
मिटेगा हर संशय, हर अंधकार,
तभी साकार होगा वास्तव में
नव संवत्सर का सच्चा सत्कार।
-मुनीष भाटिया
मोहाली

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