राज्यसभा में उठा मुद्दा
राज्यसभा में सोमवार को देश के कई सरकारी स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग टॉयलेट नहीं होने का मुद्दा उठाया गया। कांग्रेस सदस्य रंजीत रंजन ने सरकार से स्कूलों में स्वच्छता सुविधाओं का तत्काल सर्वे कराने और हर स्कूल में छात्राओं के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने सदन में आंकड़ा पेश करते हुए कहा कि हर साल २.३ करोड़ लड़कियां स्कूल छोड़ने को मजबूर होती हैं।
उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस नेता रंजीत रंजन ने कहा कि देश के सरकारी स्कूलों में छात्राओं के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी है और कई स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय नहीं है। यह गंभीर और शर्मसार करने वाली समस्या है। उन्होंने कहा कि एक समाचार के अनुसार, छत्तीसगढ़ में पांच हजार से अधिक सरकारी स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय की सुविधा नहीं है और राज्य के उच्च न्यायालय ने इसे शर्मनाक बताते हुए राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है।
स्कूल छोड़ने की मजबूरी
कांग्रेस सदस्य ने कहा कि यह केवल एक राज्य की समस्या नहीं है। हमारे देश में बुनियादी स्वच्छता सुविधाओं और मासिक धर्म प्रबंधन की सुविधाओं के अभाव में हर साल २.३ करोड़ लड़कियां स्कूल छोड़ने को मजबूर होती हैं। कई स्कूलों में न तो बालिकाओं के लिए अलग शौचालय है, न साफ पानी है, न साबुन है और न ही सैनिटरी नैपकिन के सुरक्षित निपटान की व्यवस्था है। ऐसे में लड़कियों को पढ़ाई जारी रखने में बहुत कठिनाई होती है।
रंजीत रंजन ने कहा कि कुछ राज्यों में स्थिति और अधिक चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि बिहार में २३ प्रतिशत सरकारी स्कूलों में और उत्तर प्रदेश में २९ प्रतिशत सरकारी स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्ष २०२४-२५ के एक सर्वे के अनुसार, देश में करीब १४.७२ लाख सरकारी स्कूल हैं लेकिन कई सरकारी स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग से शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है।
