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परमाणु युद्ध की दस्तक! … ईरान ने इजराइल को तबाह करने की खाई कसम

– न्यूक्लियर प्लांट को निशाना बनाने की तैयारी
– इजराइल ने बढ़ाई डिमोना परमाणु केंद्र की सुरक्षा
एजेंसी / तेहरान
ईरान युद्ध अब खतरनाक दौर में पहुंच रहा है। इस युद्ध में अब एटमी वॉर की दस्तक दे दी है। ईरान ने इजराइल को तबाह करने की कसम खाई है। उसने इजराइल के डिमोना न्यूक्लियर प्लांट पर हमले की धमकी दी है। जानकारों का मानना है कि यदि ईरान ने ऐसा किया तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई में ईरान पर परमाणु हमला कर सकता है, जिससे भारी तबाही होगी।
एक वरिष्ठ ईरानी सैन्य अधिकारी ने धमकीr दी है कि यदि अमेरिका-इजराइल उसकी मौजूदा व्यवस्था को हटाने की कोशिश करते हैं तो वह इजराइल के परमाणु ठिकानों पर सीधा हमला करेगा। उसने कहा कि ऐसी किसी भी कोशिश का जवाब कठोर तरीके से दिया जाएगा। हाल ही में इजराइली पीएम नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि इस सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य ऐसे हालात बनाना है, जिनसे ईरानी जनता मौजूदा शासन को बदल सके। तेहरान ने इसे अपने आंतरिक मामलों में सीधा हस्तक्षेप बताया है। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल की रणनीति केवल सैन्य अड्डों तक सीमित नहीं है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड और उससे जुड़े अर्धसैनिक संगठनों के ठिकानों के साथ-साथ पुलिस स्टेशनों पर भी हमला किया गया है।
प्रâांस के सहयोग से बना था केंद्र
इजराइल का प्रमुख परमाणु अनुसंधान केंद्र, ‘डिमोना’ शहर में है। यह दक्षिणी इजराइल में नेगेव रेगिस्तान में शहर के दक्षिण में स्थित है। १९५० के दशक के अंत में प्रâांसीसी सहायता से निर्मित, इस स्थल पर २४ मेगावाट का रिएक्टर होने का अनुमान है, जो हथियार-ग्रेड प्लूटोनियम उत्पादन और संभावित १८७-२७७ परमाणु हथियारों के भंडार में सक्षम माना जाता है।

अमेरिका-ईरान के बीच ‘साइबर वॉर’ …अब मिडिल-ईस्ट के लाखों सीसीटीवी हैक!
इनकी मदद से मिसाइल हमलों से पहले की जा रही है निगरानी
इंटरनेट से जुड़े कैमरों को स्कैन कर सेना को दी जा रही है जानकारी
इजराइल, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत, लेबनान, साइप्रस में अटैक

खाड़ी युद्ध दिनों-दिन जोर पकड़ता जा रहा है। वहां अब परमाणु युद्ध की धमकी दी जाने लगी है। इसी बीच साइबर सिक्योरिटी एजेंसी ‘चेक पॉइंट रिसर्च’ की ताजा स्टडी बताती है कि ईरान से जुड़े साइबर एक्टर्स ने मध्य-पूर्व के कई देशों में बड़े पैमाने पर इंटरनेट से जुड़े सीसीटीवी वैâमरों को हैक करना शुरू कर दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन वैâमरों को हैक करने का मकसद सिर्फ जासूसी नहीं हो सकता। रिसर्चर्स का कहना है कि इन वैâमरों की मदद से मिसाइल हमलों से पहले इलाके की निगरानी और हमले के बाद नुकसान का आकलन किया जा सकता है। यानी अब जंग सिर्फ मिसाइल, ड्रोन और सैनिकों से नहीं लड़ी जा रही, बल्कि सिविलियन टेक्नोलॉजी, जैसे सीसीटीवी वैâमरे भी इस युद्ध का हिस्सा बनते जा रहे हैं। बता दें कि मल्टिपल रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई के कंपाउंड में बॉम्बिंग से पहले इजराइल ने तेहरान के सैकड़ों सीसीटीव हैक किए थे, ताकि लोकेशन का सटीक अंदाजा लगाया जा सके। ‘चेक पॉइंट रिसर्च’ ने अपने डेटा में पाया कि २८ फरवरी से आईपी वैâमरों को हैक करने की गतिविधियों में अचानक तेजी आई। यह बढ़ोतरी उस समय देखी गई, जब मिडिल ईस्ट में सैन्य तनाव बढ़ रहा था और कई जगहों पर मिसाइल गतिविधियां भी दर्ज की जा रही थीं। रिसर्च के अनुसार, इस हैकिंग का दायरा सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं था। इजराइल, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत, लेबनान और साइप्रस जैसे कई देशों में इंटरनेट से जुड़े वैâमरों को स्वैâन करने और उन तक पहुंचने की कोशिशें देखी गईं। साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन हमलों के पैटर्न और इस्तेमाल किए गए नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर से संकेत मिलता है कि इनके पीछे ईरान से जुड़े साइबर थ्रेट एक्टर्स हो सकते हैं।

कनेक्टिविटी से आसान निशाना
आज दुनिया भर में लाखों सीसीटीवी और आईपी वैâमरे इंटरनेट से जुड़े हुए हैं। यही कनेक्टिविटी उन्हें आसान निशाना भी बना देती है। रिपोर्ट के मुताबिक, हमलावर पहले इंटरनेट पर ऐसे वैâमरों को स्वैâन करते हैं जो पब्लिक नेटवर्क से जुड़े होते हैं। इसके बाद वे वैâमरों में मौजूद पुरानी सुरक्षा कमजोरियों का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। रिसर्च के मुताबिक, ऐसे वैâमरे युद्ध में कई तरह से उपयोगी साबित हो सकते हैं।

 

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