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कुंभेश्वर महादेव मेले की पूर्व संध्या पर कांकलावास बांध निर्माण हेतु हस्ताक्षर अभियान, ग्रामीणों ने लिया ऐतिहासिक संकल्प

पाली-मारवाड़। पाली जिले के देसूरी उपखंड की ग्राम पंचायत बागोल स्थित प्राचीन कुंभेश्वर महादेव मंदिर बागोल में आयोजित होने वाले वार्षिक कुंभेश्वर महादेव मेला इस वर्ष केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि जनहित के एक महत्वपूर्ण संकल्प की साक्षी बनी। मेले से पूर्व आयोजित भजन संध्या में ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने क्षेत्र की जीवनरेखा माने जाने वाले कांकलावास बांध के विस्तार और पुनर्निर्माण के समर्थन में एक व्यापक हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की।

भजन संध्या के दौरान भजन मंडली ने “कुंभेश्वर महादेव बागोल रा धणी” जैसे भजनों के माध्यम से कुंभेश्वर महादेव, कांकलावास तालाब और प्राचीन “नाडी”परंपरा का ऐतिहासिक महत्व बताया। भजनों में यह संदेश दिया गया कि जिस प्रकार कुंभ पवित्र जल का प्रतीक है और शिव ईश्वर के रूप में उसकी पवित्रता के संरक्षक हैं, उसी प्रकार कांकलावास का जलाशय भी क्षेत्र की जीवनधारा रहा है। इस सांस्कृतिक प्रस्तुति ने उपस्थित श्रद्धालुओं और युवाओं को अपने क्षेत्र के इतिहास और जलसंरक्षण की परंपरा से जोड़ने का कार्य किया।

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को बताया गया कि सन् 1964 से 1974 के बीच तत्कालीन सरपंच दीपचंद सोलंकी के नेतृत्व में इस कांकलावास बांध विस्तार की महत्वाकांक्षी योजना पर कार्य प्रारंभ हुआ था, जिसके अंतर्गत भूमि अधिग्रहण, मुआवजा वितरण तथा मिट्टी-धोरे की पाल का निर्माण भी किया गया था, किंतु बजट के अभाव में यह परियोजना अधूरी रह गई। आज भी उस निर्माण के अवशेष स्थल पर दिखाई देते हैं।

भजन संध्या के बाद ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से संकल्प लेते हुए “कांकलावास बांध निर्माण परियोजना – पब्लिक सिग्नेचर कैंपेन” प्रारंभ किया। इस अभियान के तहत एक हजार से अधिक ग्रामीणों और किसानों ने हस्ताक्षर कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन तैयार करने का निर्णय लिया, जिसे जिला कलेक्टर के माध्यम से राजस्थान सरकार को भेजा जाएगा।

ग्रामीणों का मानना है कि यदि कांकलावास बांध विस्तार योजना को पुनः सर्वेक्षण कर शुरू किया जाए तो इससे मारवाड़ के सैकड़ों गांवों के लाखों किसानों को सिंचाई सुविधा मिलेगी, भूजल स्तर में सुधार होगा और क्षेत्र के आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी। इस प्रकार कुंभेश्वर महादेव मेले पर लिया गया यह संकल्प अब क्षेत्र के जल भविष्य से जुड़ा एक जनआंदोलन बनता दिखाई दे रहा है।

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