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पाली को मिला नया कलेक्टर :  डॉ. रविन्द्र गोस्वामी की नियुक्ति से विकास को नई दिशा की उम्मीद

सामना संवाददाता / पाली

राजस्थान के पाली जिले में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव हुआ है। डॉ. रविन्द्र गोस्वामी को पाली का नया जिला कलेक्टर नियुक्त किया गया है। वहीं वर्तमान कलेक्टर एल.एन. मंत्री का तबादला कर उन्हें उदयपुर में आयुक्त, टी.ए.डी. एवं देवस्थान विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
डॉ. रविन्द्र गोस्वामी वर्ष 2016 बैच के आईएएस अधिकारी हैं, जिनका शैक्षणिक और प्रशासनिक अनुभव बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज से एमबीबीएस तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से पब्लिक मैनेजमेंट में एम.ए. किया है। वर्तमान में वे राजस्थान के लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत रहे हैं। इससे पूर्व वे एसडीएम, सहायक सचिव तथा जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उन्हें आईएएस प्रशिक्षण के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए ‘कु. अरोती मुखर्जी मेमोरियल गोल्ड मेडल’ से भी सम्मानित किया जा चुका है।
ग्रामीण जनता में उत्साह, विकास की नई उम्मीद
पाली जिले में उनकी नियुक्ति के बाद ग्रामीण क्षेत्रों सहित आम जनता में खुशी की लहर देखी जा रही है। लोगों को उम्मीद है कि उनके प्रशासनिक अनुभव और दूरदर्शी सोच से जिले के विकास कार्यों को नई गति मिलेगी।
मुंबई के प्रसिद्ध वित्त विशेषज्ञ भरतकुमार सोलंकी ने भी इस नियुक्ति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. गोस्वामी का प्रोफाइल विशेष रूप से जल प्रबंधन और संसाधन नियोजन के क्षेत्र में अत्यंत उपयोगी साबित होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि जल संचयन और प्रबंधन पर उनकी नीतियां न केवल पाली जिले बल्कि पूरे मारवाड़ क्षेत्र के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकती हैं।
मारवाड़ के विकास में जल प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पाली जिला ही नहीं, बल्कि पश्चिमी राजस्थान का पूरा मारवाड़, विशेष रूप से जोधपुर संभाग, जल प्रबंधन की समस्या के कारण विकास की दौड़ में पीछे रह गया है। वर्षों से पानी की कमी, असंतुलित वितरण और सीमित संसाधनों ने औद्योगिक, कृषि और शहरी विकास को प्रभावित किया है। ऐसे में डॉ. गोस्वामी की दीर्घदृष्टि और योजनाबद्ध कार्यप्रणाली इस क्षेत्र के लिए वरदान साबित हो सकती है। यदि जल संचयन, पुनर्भरण और प्रबंधन पर ठोस नीति लागू होती है, तो न केवल पाली बल्कि पूरा मारवाड़ विकास का नया मॉडल बन सकता है।
जल संकट से समाधान की ओर बढ़ेगा पाली
विशेषज्ञों का मानना है कि पाली जैसे अर्ध-शुष्क क्षेत्र में जल प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसे में डॉ. गोस्वामी का अनुभव इस दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। यदि योजनाबद्ध तरीके से जल संरक्षण और संसाधनों का उपयोग किया गया, तो यह क्षेत्र आर्थिक रूप से भी सशक्त बन सकता है। पाली जिले को एक युवा, शिक्षित और अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी के रूप में नया नेतृत्व मिला है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि डॉ. रविन्द्र गोस्वामी किस तरह अपनी योजनाओं और कार्यशैली से जिले को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं।

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