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खाने पर बवाल के बाद रेलवे जागी! …अनधिकृत वेंडरों पर लगाम की तैयारी

जेदवी / मुंबई
भारतीय रेल में परोसे जा रहे खाने को लेकर उठे बवाल ने आखिरकार रेल प्रशासन को हरकत में ला दिया है। बीते कुछ समय में यात्रियों ने जिस तरह की शिकायतें सामने रखी हैं कहीं इस्तेमाल की गई प्लेटों का दोबारा उपयोग तो कहीं गंदे पानी से खाना तैयार करने के आरोप, उसने रेलवे की छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। खाने की गुणवत्ता और साफ-सफाई को लेकर बढ़ती नाराजगी अब रेलवे के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी थी।
लगातार आलोचना और दबाव के बीच अब रेल मंत्रालय ने सुधार की दिशा में कदम बढ़ाने का दावा किया है। नई व्यवस्था के तहत क्यूआर-कोड और डिजिटल ट्रैकिंग को लागू किया जा रहा है। रेलवे का कहना है कि वेंडरों को क्यूआर-कोड आधारित पहचान पत्र दिए जाएंगे और हर फूड पैकेट की डिजिटल निगरानी की जाएगी। यात्रियों को क्यूआर-कोड स्वैâन करने पर वेंडर और भोजन से जुड़ी पूरी जानकारी मिल सकेगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
लोकसभा में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस पहल को अनधिकृत वेंडिंग पर लगाम लगाने की दिशा में बड़ा कदम बताया। उनके अनुसार, आधुनिक बेस किचन, सीसीटीवी निगरानी, एफएसएसएआई प्रमाणन और थर्ड-पार्टी ऑडिट जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि यात्रियों को सुरक्षित और स्वच्छ भोजन मिल सके।
लेकिन सवाल यही है कि क्या यह सब सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगा या जमीनी स्तर पर भी बदलाव दिखेगा? हकीकत यह है कि आज भी कई स्टेशनों और ट्रेनों में अनधिकृत वेंडरों की मौजूदगी साफ देखी जा सकती है।

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