शिव को अर्पण
संग गंग गले नाग,
नहीं क्रोध नहीं राग,
बैठे हैं बाबा विराग,
शंकर भंडारी हैं l
गाड़ दिया है त्रिशूल,
नाश करे शत्रु मूल,
नहीं तुम जाना भूल,
भोले त्रिपुरारि है l
डम डम बाजे नाद,
अनहद है संवाद,
रखना इसे है याद,
प्रभु अविकारी हैं l
नर्तन अब सत्य का,
भय नहीं है मृत्यु का,
नाश अब असत्य का,
वो पालन हारी हैंl
-डॉ. कनक लता तिवारी
बाबा भोलेनाथ
बम- बम बाबा भोलेनाथ
तुम हो सत्यं शिवम् सुन्दरं
चंद्र विराजे जटा जूट
मां गंगा की बह चली धार।
कंठ धार लिया जब हलाहल
नील कंठ कहलाए।
वामांगे साजे मां गौरा
विनायक, कार्त्तिकेय दायें -बायें
नन्दी सिंह मोर मूषक
वाहन बन अघाये।
एक हाथ डमरू साजे
दूसरी हाथ थामा त्रिशूल
माथे सोहे नेत्र तीसरा
त्रिलोकी नाथ कहलाये।
गले पहनी मुंड माल
संग पहनी रुद्राक्ष माल
नाग वासूकी ने पाया
ग्रीवा में स्थान
दे रहे भक्तों को अभयदान।
थोड़ी सी भक्ती सो होते प्रसन्न
तभी कहलाते भोलेनाथ।
भक्ती शक्ती का संगम हो
शिव बाबा कैलाश वासी
जब जब कृपा हो तुम्हारी
पाये रिद्धियों सिद्धियों की दात
रुद्र हो रौद्र रूप दिखाएं
कर तांडव अधर्म मिटाएं
फिर भी करुणा सागर कहलाएं।
करो कृपा नवाऊं माथ
हर हर महादेव भोलेनाथ।
-बेला विरदी
शिव संदेश
दूर कैलाश से जब शिव स्वर गूंजे,
मानवता का सच्चा संदेश सुनाएँ।
न कोई धर्म, न कोई जाति का भेद,
सबमें एक ही चेतना, एक ही वेद।
नीलकंठ बन जग को राह दिखाते,
दुख सहकर सबका कल्याण करते।
त्याग, करुणा और समता का सार,
शिव में समाया सारा संसार।
मोह-माया का अंत है निश्चित,
संतोष में ही परम सुख निहित।
भौतिकता में यदि उलझा मन,
वह खो देता जीवन का धन।
शिव का संदेश हमें यह बताता,
प्रकृति से ही जीवन मुस्काता।
संतुलन में ही सृष्टि का सार,
यही है जीवन का सच्चा आधार।
आओ फिर से यह प्रण करें,
प्रकृति संग जीवन यापन करें।
मानवता को धर्म बनाएं,
शिव के पथ पर कदम बढ़ाएं।
-मुनीष भाटिया
मोहाली
सबके ये भोला,सचमुच में भोला हैं
सबके ये भोला, सचमुच में भोला हैं,
शिव शंकर भोला, कण-कण मे भोला हैं,
कंकड़ के भोला हैं, पत्थर मे भोला हैं,
मिट्टी के भोला हैं, गंगा के भोला हैं,
भोले के भोला हैं, फरिश्तो के चोला हैं,
ये ओले के भोला हैं, शोले के भोला हैं,
जटाओं मे गंगा, बम बम ये भोला हैं,
शीतलता चंद्र लिए, बैठे ये भोला हैं,
त्रिशूल संग डमरु लिए बैठे अकेला हैं,
पहाडों के प्रिय, जंगल मे अलबेला हैं,
व्यंजन हैं फल सारे, खाते बेर व केला हैं,
प्रकृति के पालक, हरियाली के भोला हैं,
शिव शंकर भोला हैं, भैरव भी भोला हैं,
भोला ही भोला, महाकाल के भोला हैं,
चिंतन मे भोला, विचारों में भोला हैं,
मेरे भी भोला, ये तेरे भी भोला हैं,
जग में भी भोला, जग के ये भोला हैं,
आबा भी भोला, बाबा भी भोला हैं,
भंगिया निराली है, पीते भी भोला हैं,
भोले शिव गोला हैं, भोला मे भोला हैं,
काशी विश्वनाथ के शंकर ये भोला हैं,
उज्जैन के महाकाल महादेव भोला हैं,
कोलकाता में भूतनाथ बन बैठे ये भोला हैं,
देवघर बैद्यनाथ धाम के बोल बम के भोला हैं,
बासुकी नाथ मे स्वयंभू भोला के चेला हैं,
अमरनाथ के गुफा, शिव बर्फ़ों के गोला हैं,
बद्रीनाथ के जल प्रलय भूकंप के खेला हैं,
सोमनाथ में भोला बने हरफनमौला हैं,
नासिक के बाबा रहते मस्त मौला हैं,
सागर तट विराजित रामेश्वरम मे भोला हैं,
औघड़ हैं, दानी हैं, अर्धनारेश्वर रखते संपोला हैं,
सच्चे ये भोला, अच्छे ये भोला,
दुनिया में सबसे अच्छे ये भोला हैं !!
सती के भोला, पार्वती के भोला हैं,
कार्तिकेय-गणेश पिता अद्भुत ये भोला हैं !!
सृजन के भोला, सृष्टि के भोला हैं,
दृष्टि के दिव्य व समष्टि के भोला हैं !!
दुनिया के भोला, निराले ये भोला हैं,
जंगल के राजा, प्रकृति के महाराजा
अद्भुत ये प्यारे सबके ही भोला हैं !
-आचार्य संजय सिंह ‘ चंदन
