श्रीकिशोर शाही
जब भी हिंदुस्थान में थोड़ी शांति नजर आती है, पाकिस्तान अपने आतंकवादियों को एक्टिवेट कर देता है। पहलगाम हमला इसका उदाहरण है। भारत जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान में कितने भी आतंकी मार गिराए, उसको कोई फर्क नहीं पड़ता। इसका कारण है कि पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र देश है, जिसे आतंक पैâलाने के लिए महाशक्तियों से पैसे मिलते हैं। कुछ हालिया घटनाओं से यह साफ हो गया है। आपने वो कहावत सुनी होगी कि एक तो करैला ऊपर से नीम चढ़ा। अब हिंदुस्थान के दो पड़ोसियों पाकिस्तान और बांग्लादेश की बढ़ती नजदीकियों को देखकर तो यही लगता है।
हाल की कुछ खबरों पर गौर करें तो पाकिस्तान ने अपनी हरकतों को बरकरार रखते हुए बांग्लादेश की कट्टरपंथी ताकतों से हाथ मिला लिए हैं। ऐसा लगता है जैसे पुराने जमाने की विलेन जोड़ी एक बार फिर ‘सीक्वल’ बनाने पर तुली हो। खासकर वहां एक समय प्रतिबंधित रही जमात-ए-इस्लामी से जुगलबंदी। जमात भारत के चिकन नेक को काटने के सपने देख रहा है। अब आप सोच रहे होंगे कि बांग्लादेश? वही बांग्लादेश जिसने कभी पाकिस्तान से लड़कर खुद को अलग किया था? तो जवाब है हां, वही! लेकिन लगता है बांग्लादेश के कुछ कट्टरपंथियों को पुराने ‘भाईजान’ की गोद में वापस बैठने का मन कर गया है। अब अगर आपको लगता है कि ये सब अकेले हो रहा है, तो जरा फिर से सोचिए। खुद को ‘महाशक्ति’ कहनेवाला चीन चुपचाप पीछे बैठकर ‘बॉयज विल बी बॉयज’ वाला भाव लिए इन्हें फंडिंग और ‘राजनयिक आशीर्वाद’ दे रहा है। भारत के लिए संदेश साफ है, ‘सावधानी हटी, आतंक बढ़ा!’ ये दोनों मुल्क अब उस पड़ोसी की तरह हो गए हैं, जो आग तो खुद के घर में लगाता है, लेकिन धुआं आपके खिड़की से भीतर आता है। समय आ गया है कि भारत अपने इंटेलिजेंस को न सिर्फ पैना रखे, बल्कि इस ‘कट्टर क्लब’ के हर मूव पर नजर रखे, क्योंकि इन जाहिलों को फर्क नहीं पड़ता कि भारत क्या जवाबी कार्रवाई करता है, इन्हें बस फंडिंग मिलती रहे, चाहे वो चीन से आए या किसी और गुप्त गॉडफादर से। आतंक का ये नया एडिशन भारत के लिए ट्रेलर नहीं, वॉर्निंग है। जवाब जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है जवाबदेही। दुनिया को ये बताना कि ‘भारत के खिलाफ आतंक की दुकानें जहां भी खुलेंगी, भारत वहां ताला जरूर लगाएगा!’
