मुख्यपृष्ठस्तंभ स्कैम्स एंड स्कैंडल्स : पैलेस के बाहर फूलों का सैलाब!

 स्कैम्स एंड स्कैंडल्स : पैलेस के बाहर फूलों का सैलाब!

(एक परी कथा का अंत–३)
श्रीकिशोर शाही

३१ अगस्त १९९७ की सुबह लंदन में सामान्य नहीं थी। पेरिस से आई दुखद खबर ने कुछ ही घंटों में ब्रिटेन को मानो ठप कर दिया। बकिंघम पैलेस के बाहर लोग स्वत: जमा होने लगे। किसी आधिकारिक आह्वान की आवश्यकता नहीं पड़ी। लोगों के चेहरे उदास थे। हाथों में फूल थे और चेहरों पर अविश्वास। जो हंसती-खिलखिलाती राजकुमारी कभी वैâमरों से घिरी रहती थी, अब उन्हीं वैâमरों की रोशनी के सामने आंखें बंद किए खामोश थी।
टेलीविजन चैनलों ने नियमित कार्यक्रम रोक दिए। अखबारों के विशेष संस्करण निकले। प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने सार्वजनिक वक्तव्य दिया और डायना को ‘पीपल्स प्रिंसेस’ कहा। यह शब्द तुरंत जनभावना का हिस्सा बन गया। शोक निजी नहीं रहा, वह राष्ट्रीय अनुभव बन गया। केंसिंग्टन पैलेस के बाहर फूलों का सैलाब उमड़ पड़ा। संदेश लिखे गए-धन्यवाद, क्षमा, प्रेम। लोग घंटों कतार में खड़े रहे। यह केवल एक राजपरिवार के सदस्य के लिए शोक नहीं था, बल्कि उस व्यक्तित्व के लिए था, जिसने अस्पतालों, एड्स रोगियों और लैंडमाइन पीड़ितों के बीच जाकर हाथ थामा था। राज परिवार उस समय स्कॉटलैंड के बालमोरल एस्टेट में था। शुरुआती चुप्पी ने बहस को जन्म दिया। क्या राज परिवार में ही प्रिंसेस डायना के खिलाफ कहीं कोई साजिश तो नहीं रची गई? जितने मुंह, उतनी बातें। जनता खुली प्रतिक्रिया चाहती थी। झंडे आधे झुके, पर सवाल उठे, राजमहल सार्वजनिक रूप से क्यों नहीं बोल रहा। कुछ दिनों के भीतर दबाव इतना बढ़ा कि रानी एलिजाबेथ द्वितीय ने राष्ट्र के नाम संदेश दिया।
उधर पेरिस में इस दुर्घटना की जांच जारी थी। दुर्घटना के तथ्य जुटाए जा रहे थे, लेकिन ब्रिटेन में भावनाएं तथ्य से आगे थीं। अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू हुई। ६ सितंबर को वेस्टमिंस्टर एबी में अंतिम विदाई का निर्णय लिया गया। विश्व नेताओं और असंख्य प्रशंसकों की उपस्थिति में यह समारोह होना था। यह शोक केवल मृत्यु की प्रतिक्रिया नहीं था। यह उस रिश्ते का परिणाम था, जो डायना ने सीधे जनता से बनाया था। वैâमरों के पार, औपचारिकता के बाहर। पेरिस की सुरंग से उठी खबर ने ब्रिटेन की सड़कों को भर दिया।
(शेष अगले अंक में)

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