मुख्यपृष्ठस्तंभस्कैम्स एंड स्कैंडल्स : डायना को मीडिया ने बनाया था स्टार

स्कैम्स एंड स्कैंडल्स : डायना को मीडिया ने बनाया था स्टार

(एक परी कथा का अंत–११)

श्रीकिशोर शाही
१९९० के दशक की शुरुआत तक प्रिंस चार्ल्स और डायना के विवाह की दरार सिर्फ केवल महल की दीवारों तक सीमित नहीं रही। वह दीवारों को पार करके मीडिया के संपादकीय कक्षों तक पहुंचने लगी थी। टैब्लॉयड्स और टीवी चैनलों में इस बारे में खबरें आने लगी थीं। अखबारों और टेलीविजन चैनलों ने डायना के हर सार्वजनिक कार्यक्रम, हर यात्रा और हर हावभाव को अलग नजर से देखना शुरू कर दिया। खबरें भले ही राजपरिवार के लिए निगेटिव रही हों पर मीडिया ने डायना को स्टार बना दिया था। एक ऐसी स्टार जो हॉलीवुड की ग्लैमरस स्टार को भी पीछे छोड़ चुकी थी।
१९९२ में स्थिति और साफ हो गई, जब पत्रकार एंड्रयू मॉर्टन की पुस्तक प्रकाशित हुई। इस पुस्तक में डायना के निजी संघर्ष, मानसिक दबाव और विवाह के भीतर की दूरी का विस्तार से उल्लेख किया गया। राजमहल ने शुरुआत में इसे अफवाह बताया, लेकिन पुस्तक ने सार्वजनिक चर्चा को नई दिशा दे दी। लोगों को पहली बार यह महसूस हुआ कि ग्लैमर और चकाचौंध के पीछे एक जटिल निजी जीवन भी है।
इसी समय मीडिया में रिकॉर्ड की गई निजी बातचीतों के अंश भी सामने आने लगे। इन टेपों में चार्ल्स और वैâमिला पार्कर बाउल्स के बीच संवाद की चर्चा हुई। इन खुलासों ने विवाद को और गहरा कर दिया। अखबारों के पहले पन्नों पर यह विषय लगातार छाया रहने लगा।
डायना भी अब पहले जैसी चुप नहीं रहीं। सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही थी। वह अस्पतालों, एड्स रोगियों और सामाजिक अभियानों में सक्रिय दिखाई देती थीं। आम लोगों के साथ उनका सहज व्यवहार उन्हें अलग पहचान दे रहा था। लेकिन इसी लोकप्रियता ने मीडिया की दिलचस्पी और बढ़ा दी। वैâमरे हर जगह उनका पीछा करने लगे। निजी जीवन और सार्वजनिक छवि के बीच की दूरी लगभग समाप्त हो गई। राज परिवार के लिए यह स्थिति असहज थी, क्योंकि राजशाही परंपरागत रूप से निजी मामलों को सार्वजनिक बहस से दूर रखती रही थी। अब यह स्पष्ट था कि विवाह के भीतर का संकट केवल पारिवारिक मुद्दा नहीं रह गया। वह मीडिया, जनता और राज परिवार की प्रतिष्ठा के बीच खुली जंग में बदल चुका था।
(शेष अगले अंक में)

अन्य समाचार