राजन पारकर / मुंबई
महाराष्ट्र सरकार की लापरवाही का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए छात्रवृत्ति की उम्मीद लगाए बैठे 93 हजार से अधिक विद्यार्थियों की अर्जियां अभी भी जांच के इंतजार में पड़ी हैं। सरकार की ढीली कार्यप्रणाली के कारण हजारों विद्यार्थियों का भविष्य संकट में पड़ गया है। महाराष्ट्र विधान परिषद में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील ने यह जानकारी दी। यह प्रश्न विधान परिषद सदस्य डॉ. मनीषा कायंदे और अन्य सदस्यों ने उठाया था।
सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 27 फरवरी 2026 तक 93,326 विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति अर्जियां जांच के लिए लंबित हैं। इनमें से 81,753 अर्जियां चालू शैक्षणिक वर्ष 2025-26 की हैं, जबकि 11,573 अर्जियां पिछले चार वर्षों से लंबित पड़ी हुई हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले पांच वर्षों में 1,42,383 विद्यार्थियों की अर्जियां जांच के इंतजार में अटकी हुई थीं। यानी हजारों विद्यार्थी आर्थिक सहायता की उम्मीद में सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते रहे, लेकिन व्यवस्था की सुस्ती के कारण उन्हें समय पर मदद नहीं मिल सकी।
विधान परिषद में कई सदस्यों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि विद्यार्थियों को समय पर छात्रवृत्ति नहीं मिली तो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो सकते हैं। यह स्थिति राज्य की शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर खतरे की घंटी है।
सरकार की ओर से सफाई देते हुए मंत्री चंद्रकांत पाटील ने कहा कि कई मामलों में विद्यार्थी आवश्यक दस्तावेज संलग्न नहीं करते, आवेदन की छपी प्रति महाविद्यालय में जमा नहीं करते या गलत कागजात जमा कर देते हैं, जिसके कारण जांच प्रक्रिया में देरी होती है।
हालांकि, सरकार की इस दलील से विपक्ष और कई शिक्षाविद संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि यदि व्यवस्था पारदर्शी और मजबूत होती तो हजारों विद्यार्थियों की अर्जियां वर्षों तक लंबित नहीं रहतीं।
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2021-22 से 2025-26 के बीच कुल 9,68,597 विद्यार्थियों ने छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया था, जिनमें से 7,80,495 विद्यार्थियों को ही छात्रवृत्ति मंजूर की गई। इस अवधि में सरकार ने 708 करोड़ 41 लाख रुपये की राशि वितरित करने का दावा किया है।
लेकिन सवाल वही है —
यदि सरकार सचमुच शिक्षा के प्रति गंभीर है, तो हजारों विद्यार्थियों की अर्जियां आज भी सरकारी फाइलों में क्यों धूल खा रही हैं?
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार ने तुरंत इस समस्या का समाधान नहीं किया तो गरीब और मध्यम वर्ग के हजारों विद्यार्थियों का उच्च शिक्षा का सपना अधूरा रह सकता है।
अब देखना यह है कि सरकार इस गंभीर मुद्दे पर केवल आंकड़े पेश करती रहेगी या सच में विद्यार्थियों के भविष्य को बचाने के लिए ठोस कदम उठाएगी।
