धीरज फूलमती सिंह
मुंबई
हिमालय की कंदराओं में एक काला, चिपचिपा, गाढ़ा, रेशेदार तरल पदार्थ मिलता है, जिसे हम शिलाजीत के नाम से जानते हैं। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में शिलाजीत का बहुत महत्व है।
शिलाजीत का एक शक्ति वर्धक दवाई के तौर पर प्रयोग किया जाता है। यह शरीर का स्टेमिना बढ़ाता है। सामान्यत यह यौन शक्ति बढ़ाने की दवाई के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। यह दिमाग की शक्ति बढ़ाता है, खून की कमी में कारगर है। वैसे सच्चाई यह है कि शुद्ध शिलाजीत का रोज दिन में दो बार वह भी मुंग के एक दाने बराबर लगातार तीन महिने तक सेवन किया जाए तो ही यह असरकारक होता है।
हिमालय पर्वत की कंदराओं में पाया जाने वाला शुद्ध शिलाजीत काफी कीमती होता है। खुले बाजार में १० ग्राम मतलब एक तोला शुद्ध शिलाजीत ६००/- रुपए में आसानी से मिल जाता है। यही शिलाजीत सभी खर्च और मुनाफे जोड़कर ब्रांडेड आयुर्वेदिक दवाई कंपनियां सिर्फ १५ से २० ग्राम का पैकेट्स आप को ३२०/- से -३६०/ रुपए के मध्य में उपलब्ध करवा देती हैं। उपर से कई कंपनियां तो १,५०,०००/- रुपए तोला बिक रहे सोने का अंश भी दवाई में डालकर इतने ही रुपए में बेच भी रही हैं! कैसे ? यह खोज का विषय है।
आप सहसा विश्वास नहीं करेंगे, लेकिन यह सच है कि बाजार में मिलने वाला ८२ प्रतिशत शिलाजीत नकली होता है। कई ब्रांडेड आयुर्वेदिक कंपनियां भी नकली या मिलावटी शिलाजीत बेचती हैं।
आप को जानकर ताज्जुब होगा कि नकली शिलाजीत बनाने के लिए ७० प्रतिशत बंदर की टट्टी और ३० प्रतिशत कोलतार (डांबर) के मिश्रण का प्रयोग होता है, यानी ८२ प्रतिशत लोग खुले बाजार से शुद्ध शिलाजीत के नाम पर बंदर की टट्टी और कोलतार का मिश्रण खा रहे हैं। यही अधिकांश नकली शिलाजीत नेपाल में बनता है, जिसे शुद्ध हिमालयन शिलाजीत के नाम से भारत के खुले बाजार में बेच दिया जाता है।
