-प्रख्यात लेखिका सूर्यबाला से सृजन संवाद और ‘इतनी सी बात’ लघु नाटक की प्रस्तुति
सामना संवाददाता / मुंबई
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर चित्रनगरी संवाद मंच, मुम्बई की ओर से रविवार, 8 मार्च 2026 को गोरेगांव स्थित केशव गोरे स्मारक ट्रस्ट के मृणालताई हाल में एक विशेष साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रख्यात कथाकार-व्यंग्यकार सूर्यबाला से “सृजन संवाद” के अंतर्गत मुम्बई की महिला रचनाकारों ने साहित्य और लेखन से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका उन्होंने अत्यंत संवेदनशील और संतुलित उत्तर दिया।
सूर्यबाला जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि लेखन किसी योजना या सुविधा के अनुसार नहीं, बल्कि भीतर उठती संवेदनाओं और ऊहापोह से जन्म लेता है। उनके अनुसार, “लेखन अक्सर बेख़ुदी में होता है और लेखक के भीतर मौजूद सच्चाई ही उसे लिखने की शक्ति देती है।” उन्होंने यह भी कहा कि कहानी लिखना दरअसल मन के भीतर उमड़ती-घुमड़ती अनुभूतियों की स्वाभाविक प्रतिक्रिया है।
अपने प्रिय पात्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने ‘वेणु की डायरी’ के वेणु और ‘मेरे संधि-पत्र’ के रत्नेश को विशेष रूप से याद किया। उन्होंने कहा कि उनकी रचनाओं में कोई खलनायक या खलनायिका नहीं होती, क्योंकि उनका विश्वास है कि लेखन मनुष्य की शाश्वत अनुभूतियों पर आधारित होता है। उन्होंने यह भी कहा कि जीवन में कब झुकना है, यह समझना बहुत आवश्यक है, क्योंकि तनकर खड़े रहने से मनुष्य टूट भी सकता है।
कार्यक्रम के दौरान सूर्यबाला जी ने अपने जीवन और लेखन यात्रा के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि बचपन में पिता के असमय निधन के कारण उनका बचपन संघर्षपूर्ण रहा और लेखन उनके लिए दुखों की शरणस्थली बन गया। ‘सारिका’ के संपादक कमलेश्वर के सुझाव पर उन्होंने अपनी पहली कहानी ‘जीजी’ लिखी, जो बाद में पत्रिका में प्रकाशित हुई।
कार्यक्रम के संचालक देवमणि पांडेय के अनुरोध पर सूर्यबाला जी ने अपनी व्यंग्य रचना ‘महिला दिवस और फ्रेंच टोस्ट’ का पाठ भी किया, जिसे श्रोताओं ने तालियों और ठहाकों के साथ खूब सराहा। कार्यक्रम के अंत में कथाकार सूरज प्रकाश ने सूर्यबाला जी के लेखन की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए सभी को महिला दिवस की शुभकामनाएं दीं।
सृजन संवाद में मुम्बई की दस महिला रचनाकारों—रचना शंकर, पारमिता षड़ंगी, उषा साहू, सोनाली बोस, प्रज्ञा मिश्र, प्रतिमा सिन्हा, अर्चना जौहरी, लता हया, सविता मनचंदा और मधुबाला शुक्ल—ने साहित्य और लेखन से जुड़े अपने प्रश्न रखे। श्रोताओं ने सूर्यबाला जी के शालीन, स्पष्ट और प्रेरणादायी उत्तरों की मुक्त कंठ से सराहना की।
कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण लता हया और अर्चना जौहरी द्वारा प्रस्तुत लघु नाटक ‘इतनी सी बात’ रहा। राजस्थानी जेठानी और उत्तर प्रदेश की देवरानी के बीच नोंक-झोंक और आत्मीयता पर आधारित इस नाटक ने दर्शकों को खूब आनंदित किया। देवरानी-जेठानी के प्रेम और सौहार्द से भरे संवादों ने वातावरण को भावुक बना दिया। ढोलक की ताल और लोकगीतों की लय में श्रोता भी झूमते दिखाई दिए।
दोनों कलाकारों के सहज और प्रभावशाली अभिनय ने दर्शकों को शुरू से अंत तक बांधे रखा। प्रसिद्ध अभिनेता राजेंद्र गुप्ता ने नाटक की सराहना करते हुए दोनों अभिनेत्रियों को बधाई दी और कहा कि उन्होंने पूरे कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। कथाकार सूर्यबाला ने भी नाटक के संवादों और अभिनय की प्रशंसा करते हुए कलाकारों को शुभकामनाएं दीं। नाटक की प्रस्तावना मधुबाला शुक्ल ने प्रस्तुत की।
इस प्रकार साहित्यिक संवाद और सांस्कृतिक प्रस्तुति से सजे इस आयोजन ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को एक सार्थक और यादगार स्वरूप प्रदान किया।
