मुख्यपृष्ठस्तंभस्पॉटलाइट : मुंबई-अमदाबाद बुलेट ट्रेन का बढ़ा बोझ

स्पॉटलाइट : मुंबई-अमदाबाद बुलेट ट्रेन का बढ़ा बोझ

द्रुप्ति झा
भूमि अधिग्रहण में देरी के कारण लागत में ८३ प्रतिशत की हुई वृद्धि
परियोजना की लागत ९० हजार करोड़ रुपए बढ़ी

किसी न किसी कारण से विवादों में बनी रहने वाली मुंबई-अमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की लागत में भारी भरकम ९०,००० करोड़ रुपए की वृद्धि हुई है। इस परियोजना को पूरा करने की लागत लगभग १.०८ लाख करोड़ रुपए से बढ़कर १.९८ लाख करोड़ रुपए या २१.५ अरब डॉलर हो गई है।
एक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी ने बताया है कि मुंबई-अमदाबाद हाई स्पीड रेल (एमएएचएसआर) कॉरिडोर के लिए बाहरी धन की आवश्यकता नहीं होगी। अधिकारी ने बताया कि भूमि अधिग्रहण में देरी के कारण लागत में ८३ प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष २०२७ के बजट में राष्ट्रीय उच्च गति रेल निगम के लिए १५,००० करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। यह राशि इस वर्ष के जीबीएस के १५ हजार ५०० करोड़ रुपए के पूंजीगत व्यय से कम है। रेलवे वित्त मंत्रालय से और अधिक धनराशि प्राप्त करने की योजना बना रहा है। जीआईसीए ने २०१७ से इस परियोजना के लिए ५९,३९६ करोड़ रुपए का ऋण दिया है। ५०८ किलोमीटर लंबी यह परियोजना जापान की सहायता और वित्त पोषण से निर्मित की जा रही है। २०१७ में शुरू हुई यह परियोजना मूल रूप से २०२३ तक पूरी होनी थी, लेकिन अब इसके २०२९ तक पूरी होने की उम्मीद है। बता दे कि मुंबई-अमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए गुजरात, महाराष्ट्र और दादरा-नगर हवेली में १०० प्रतिशत भूमि अधिग्रहण पूरा हो चुका है। शुरू में महाराष्ट्र में विरोध और कानूनी अड़चनों के कारण देरी हुई, जिस वजह से परियोजना का कार्य धीमा हो गया। लेकिन अब जानकारी के अनुसार, सभी जमीनें हासिल कर ली गई हैं। इस विलंब से परियोजना की लागत लगभग ९०,००० करोड़ बढ़कर १.९८ लाख करोड़ हो गई है।

परियोजना कार्य में देरी के प्रमुख कारण
ठाणे के ग्रामीण इलाकों, जैसे दिवा और भिवंडी, में किसानों ने परियोजना के खिलाफ अनशन शुरू किया था है। उनका आरोप था कि परियोजना की योजना बनाते समय उनसे चर्चा नहीं की गई जिस वजह से वहां के रहिवासियों के अंदर खुद को भूमिहीन होने का डर सताने लग गया था। परियोजना की २१ किमी लंबी भूमिगत सुरंग (जिसमें ७ किमी समुद्र के नीचे ले जाने से टनल बोरिंग मशीनों को चीन से मिलने में देरी हुई, जिससे काम प्रभावित हुआ, हालांकि बाद में राजनयिक प्रयासों से यह बाधा दूर की गई। महाराष्ट्र में पालघर और अन्य क्षेत्रों में किसानों/ग्रामीणों के विरोध के कारण भूमि अधिग्रहण में काफी समय लगा। तमाम कानूनी पचड़ों में फंसने के कारण परियोजना की लागत में वृद्धि हुई। मुंबई-अमदाबाद उच्च गति रेल परियोजना की बढ़ती लागत बड़े बुनियादी ढांचा उपक्रमों की वित्तीय चुनौतियों को उजागर करती है।

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