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स्पॉट लाइट : मनपा करेगी वायू प्रदूषण को `बांस’!..मुंबईकरों ने किया अट्ठाहास… १.५ करोड़ रुपए से अधिक का बजट किया गया आवंटित

डी बृजेश झा

मुंबई में चल रहे निर्माण कार्यों से पैâलते वायु प्रदूषण को रोकने में बीएमसी की विफलता के चलते हवा जहरीली बनी हुई है, जिसे लेकर मुंबई हाई कोर्ट ने कई बार असंतोष जताया है। ५०-६० प्रतिशत प्रदूषण के लिए जिम्मेदार, नियमों का उल्लंघन करने वाली १,००० से अधिक साइटों को काम रोकने की नोटिस दिए जाने के बावजूद मुंबई की हवा की गुणवत्ता खराब होती जा रही है और अब बीएमसी ने एयर पॉल्यूशन कम करने के लिए मुंबई में बड़े पैमाने पर बांस लगाने की एक मुहिम शुरू की है, जिसका उद्देश्य मुख्य रूप से धूल कणों को रोकना, कार्बन डाईऑक्साइड को अवशोषित करना और शहर की वायु गुणवत्ता में सुधार करना है। खासकर, निर्माण स्थलों के आस-पास लेकिन देखने वाली बात यह है कि मनपा द्वारा चलाए जा रहे अभियान मुंबई जैसे शहर के वातावरण को कितने प्रतिशत तक खराब श्रेणी से अच्छे श्रेणी में कब तक लाएगी?
१.५ करोड़ रुपए से अधिक का बजट आवंटित किया गया
यह परियोजना मुख्य रूप से पूर्वी उपनगरों के २० से अधिक स्थानों पर लागू की जा रही है, जिनमें चूनाभट्टी, चेंबूर, मानखुर्द, घाटकोपर, भांडुप और कांजुरमार्ग शामिल हैं। बता दें कि इस अभियान के लिए १.५ करोड़ रुपए से अधिक का बजट आवंटित किया है और विभिन्न उद्यानों में बांस लगाने के लिए १२ निविदाएं आमंत्रित की हैं। शुरुआत में वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे और ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे के किनारे लगभग ५ लाख बांस के पौधे लगाने की योजना बनाई गई थी। पहले चरण में भांडुप से विक्रोली के कन्नमवार नगर तक का पैच चुना गया था।
क्यों चुना गया बांस?
बांस पारंपरिक पेड़ों की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ता है, कम पानी लेता है और इसकी घनी झाड़ियां धूल कणों को फंसाने में बेहद प्रभावी हैं। यह पहल शहर के खाली पड़े नागरिक भूखंडों, सड़क के किनारों और धूल पैदा करने वाले निर्माण स्थलों के आस-पास की जा रही है। एक अध्ययन से पता चला है कि बांस की पत्तियां और जैसे महीन पार्टिकुलेट मैटर को रोकने में मदद करती हैं। मनपा का दावा है कि यह पहल न केवल तत्काल धूल नियंत्रण में मदद करेगी, बल्कि शहर के हरित आवरण को बढ़ाकर तापमान को नियंत्रित करने में भी योगदान देगी। विशेषज्ञों के अनुसार, बांस अन्य पेड़ों की तुलना में ३५ प्रतिशत अधिक ऑक्सीजन छोड़ता है और अधिक कार्बन डाईऑक्साइड सोखता है। इसकी घनी पत्तियां एक प्राकृतिक ढाल की तरह काम करती हैं, जो निर्माण कार्यों और सड़कों से उड़ने वाली धूल को रोकने में मदद करती हैं।
वर्तमान स्थिति और चुनौतियां
भांडुप और विक्रोली के बीच कुछ हिस्सों में साल्ट कमिश्नर से अनुमति न मिलने के कारण कुछ पैच पर काम रुका हुआ है। कुछ पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि स्थानीय जैव विविधता को बनाए रखने के लिए केवल बांस लगाने के बजाय स्थानीय प्रजातियों का मिश्रण लगाना बेहतर होगा। यह पहल `मुंबई डस्ट मिटिगेशन प्लान’ का हिस्सा है। इस खबर को लेकर जब हम बीएमसी जनसंपर्क अधिकारी तानाजी कांबले से बात की तो उन्होंने साफतौर पर उनकी ओर से इस योजना के बारे में कोई भी जानकारी उन्हें नहीं है, ऐसी प्रतिक्रिया दी गई।

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