हिमांशु राज
अभिनेत्री संजना सांघी ने संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम भारत के साथ मिलकर “घर से शुरू” अभियान की शुरुआत की है। यह पहल घरेलू स्तर पर गहरी जड़ें जमा चुकी लैंगिक रूढ़ियों को तोड़ने का प्रयास है। संजना का कहना है कि सच्ची समानता की नींव घर की चारदीवारी से ही पड़ती है।
इस अभियान के तहत डिजिटल कहानियों के माध्यम से परिवारों से पारंपरिक भूमिकाओं पर पुनर्विचार करने की अपील की जा रही है। संजना ने अदृश्य श्रम पर विशेष जोर दिया, जो खाना पकाने, सफाई और देखभाल जैसे कार्यों से जुड़ा होता है और अक्सर महिलाओं तक ही सीमित रह जाता है। उनका मानना है कि सामाजिक परिवर्तन केवल नीतियों से नहीं, बल्कि रोजमर्रा के व्यवहार से भी संभव होता है।
यह अभियान तीन मुख्य क्षेत्रों पर केंद्रित है। पहला, घरेलू कार्यों का समान बंटवारा, ताकि पुरुष और बालक भी सक्रिय रूप से भागीदारी निभाएं। दूसरा, निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करना, चाहे वह आर्थिक निवेश से जुड़ा मामला हो या बच्चों के भविष्य से संबंधित निर्णय। तीसरा, पीढ़ियों से चली आ रही रूढ़ियों को समाप्त करना, जैसे कि कमाने वाले और देखभाल करने वाले की सीमित भूमिकाएं।
अभियान के शुभारंभ के अवसर पर संजना ने कहा, “हम कार्यस्थल पर समानता की बातें करते हैं, लेकिन भोजन की मेज पर मौजूद असमानता को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। यदि बालक अपने पिता को रसोई में मदद करते और माता को महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए देखे, तो समानता उसके लिए स्वाभाविक बन जाएगी।”
यह अभियान विशेष रूप से कामकाजी महिलाओं पर पड़ने वाले दोहरे बोझ को भी उजागर करता है। संजना का कहना है कि घर और बाहर दोनों जिम्मेदारियां निभाने वाली महिलाओं के श्रम को पहचानना और उसे साझा करना समाज की जिम्मेदारी है।
“घर से शुरू” केवल एक ट्रेंड नहीं, बल्कि हर नागरिक के लिए एक आह्वान है। संजना का मानना है कि छोटे-छोटे बदलावों के जरिए समानता पर आधारित बेहतर भविष्य का निर्माण किया जा सकता है। उनकी युवा अपील और सामाजिक सरोकारों के प्रति जागरूकता इस अभियान को व्यापक स्तर पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
