सामना संवाददाता / मुंबई
राजसत्ता और धर्मसत्ता मुट्ठीभर विशेष लोगों के हाथों में रहे, यही भाजपा और संघ की सोच है। सत्ता, संपत्ति, द्वेष और भय के माध्यम से धर्मांध राजनीति की जा रही है। संविधान और जन अधिकारों को नकारने वाली भाजपा सरकार की सोच ‘हम करे सो कानून’ है। ऐसा जोरदार हमला कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने भाजपा व आरएसएस पर किया।
सपकाल ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में यह घृणात्मक विचार तेजी से बढ़ रहा है। ‘अब की बार ४०० पार’ का नारा इसलिए दिया गया था, ताकि संविधान बदला जा सके। इसी सोच के कारण छत्रपति शिवाजी महाराज को भी राज्याभिषेक से वंचित किया गया था। वे नासिक में कार्यकर्ता प्रशिक्षण सम्मेलन में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि संविधान बनाम आरएसएस की इस लड़ाई में पूर्व सरसंघचालक गोलवलकर की पुस्तक ‘बंच ऑफ थॉट’ पर आधारित व्यवस्था बनाने की भाजपा और संघ की साजिश है। हमें इसे नाकाम करना चाहिए और संविधान की विचारधारा को अपनाना चाहिए, वही देश को बचाने वाला मार्ग है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा ही संविधान की विचारधारा है, जो समानता, बंधुता, शांति, सभी को समान न्याय और स्त्री-पुरुष समानता का समर्थन करती है। शिवाजी महाराज, शाहू महाराज, महात्मा फुले, डॉ. आंबेडकर और वारकरी परंपरा के महापुरुषों के विचारों की एक धारा है और वही कांग्रेस की धारा है। भाजपा की आइडिया ऑफ इंडिया और कांग्रेस की आइडिया ऑफ इंडिया में बहुत बड़ा अंतर है।
भाजपा की नीति ‘फूट डालो और राज करो’
समापन भाषण में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री वसंत पुरके ने भाजपा सरकार की सांप्रदायिक राजनीति की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि भाजपा की नीति ‘फूट डालो और राज करो’ की है। समाज में जाति और धर्म के आधार पर झगड़े लगाकर भाजपा अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रही है।
