संजय राऊत
यह नहीं माना जा सकता कि ईरान-इजरायल युद्ध समाप्त हो गया है। इस युद्ध के लिए नेतन्याहू और राष्ट्रपति ट्रंप जितने जिम्मेदार हैं, उतने ही वे लोग भी जिम्मेदार हैं जिन्होंने युद्धकाल में इजरायल को ‘फादरलैंड’ (पितृभूमि) के रूप में मान्यता दी। इन सबको ‘युद्ध अपराधी’ ही माना जाना चाहिए और फिर ‘बाल देवता’ को बलि देने की दंतकथा युद्धभूमि पर है ही!
ईरान-इजरायल युद्ध आज भी समाप्त नहीं हुआ है। ट्रंप द्वारा एकतरफा ‘हम युद्ध जीत गए हैं’ घोषित कर देने से युद्ध का परिणाम निकल गया, ऐसा नहीं कहा जा सकता। राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्धकाल में कई बार मूर्खतापूर्ण बयान दिए। उन्होंने यह कहकर अपने बौद्धिक दिवालियापन का परिचय दिया कि ‘अपने दामाद जेरेड कुशनर के कहने पर मैंने ईरान के साथ युद्ध किया।’ यह साफ तौर पर सिरफिरापन है। राष्ट्रपति ट्रंप चाहे कोई भी बयान दें, लेकिन यह तय है कि ईरान अब पीछे नहीं हट रहा। ईरान का रुख है कि ‘यह युद्ध अब हम अंत तक ले जाएंगे’। ईरान का लगभग तीन हजार वर्षों का इतिहास है, जबकि इजरायल का वैसा नहीं है। यहूदी (ज्यू) लोगों ने अपने लिए जो देश खड़ा किया, उसे अभी सौ साल भी पूरे नहीं हुए हैं। उन्होंने अरबों की भूमि पर घुसपैठ कर और जमीन पर कब्जा कर अपना देश बनाया। फिर जिन अरबों की जमीन पर वे बसे, उन्हीं को बेघर किया और अब फिलिस्तीनी पट्टी (गाजा) का पूर्ण विनाश कर दिया। बेशक, ईरान के मामले में भी इजरायल वही रणनीति अपनाने गया, लेकिन पासा उन पर ही पलट गया। दुनियाभर के यहूदी इकट्ठा हुए, उन्होंने मेहनत से अपने देश का निर्माण किया। उसके लिए कई संघर्ष और युद्ध किए, परंतु वह शानदार देश आज प्रधानमंत्री नेतन्याहू और राष्ट्रपति ट्रंप के कारण मलबे के ढेर में बदल रहा है। उनकी भव्य राजधानी तेल अवीव ईरानी बम हमलों में जल गई और हजारों लोगों के घर नष्ट हो गए। इजरायल ने जो गाजा में किया, वही तेल अवीव में होते हुए दुनिया ने देखा। युद्ध अंतत: निर्दोषों की ही सर्वाधिक बलि लेता है।
वजह क्या?
ईरान-इजरायल में युद्ध का सटीक कारण क्या है, यह कोई भी नहीं बता पाया है। ईरान परमाणु कार्यक्रम कर रहा है और उसने परमाणु बम बना लिया है, यह नेतन्याहू का आरोप यदि सच होता तो वह परमाणु बम ईरान ने इजरायल पर फेंकने में देर नहीं की होती। ईरान के पास मिसाइलों का प्रचंड भंडार है और उस हमले में नेतन्याहू जैसे लोगों की भागदौड़ मच गई। यह परमाणु हथियारों का युद्ध नहीं है। यह एक प्रकार का धर्मयुद्ध है। ‘यहूदी विरुद्ध मुसलमान’ ऐसा यह युद्ध का प्रकार स्पष्ट दिखता है और इसे जेप्रâी एपस्टीन की गुप्त फाइलों का संदर्भ है। स्वयं एपस्टीन यहूदी था और वह मोसाद के लिए बड़ी भूमिका निभा रहा था। राष्ट्रपति ट्रंप का दामाद जेरेड कुशनर यहूदी है। अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर यहूदी लोगों की पकड़ है। BlackRock, Rothschilds परिवार के हाथ में अमेरिका की अर्थव्यवस्था है। ये सभी अमेरिका के प्रभावशाली यहूदी इकट्ठा हुए और उन्होंने युद्ध की चिंगारी भड़काई। इजरायल और शिया मुस्लिमों के वर्चस्व वाले ईरान में कई वर्षों से धार्मिक तनाव है। उसमें अब ‘बाल’ (Baal) देवता का संदर्भ कुछ लोगों ने लाया है। कुछ यहूदी इस देवता को मानते हैं, कुछ नहीं मानते। बाल देवता की पूजा शक्ति और अघोरी शक्ति प्राप्त करने के लिए करते हैं। एपस्टीन अपने द्वीप पर इस ‘बाल’ यहूदी देवता की पूजा कर रहा था। इस पूजा में छोटी बच्चियों की बलि दी जाती थी और प्रसाद के रूप में उनका रक्त पीया जाता है, तभी यह विधि पूरी तरह सफल होती है, ऐसा बताया जाता है। कई महत्वपूर्ण यहूदी धर्मावलंबियों का दावा है कि एपस्टीन ने दुनिया के ताकतवर लोगों को ब्लैकमेल करके उन्हें शक्ति दिलाने की बात कहकर ‘बाल’ देवता की विधि में शामिल कर लिया। दुनियाभर के बड़े उद्योगपति, राजनीतिज्ञों ने इजरायल को अपना ‘फादरलैंड’ घोषित किया और वे उस विधि में शामिल हुए। अमेरिका स्थित एक यहूदी पत्रकार ने अलग और चौंकानेवाली जानकारी दी। शक्ति देवता ‘बाल’ की मूर्ति ईरान में जलाई गई। उसका बदला लेने के लिए छोटी बच्चियों के स्कूल पर बम गिराकर दो सौ बच्चियों की आहुति ‘बाल’ देवता को देकर इजरायल-अमेरिका ने युद्ध शुरू किया। इजरायल को ‘फादरलैंड’ के रूप में मान्यता देने वालों ने यह नरसंहार सहन किया। ऐसी कई दंतकथाएं और कहानियां युद्ध की पृष्ठभूमि पर चर्चित हो रही हैं। ईरान पर इतना भयानक हमला करके अपने देश की बर्बादी मोल लेने का इजरायल के पास कोई कारण नहीं था, लेकिन ‘बाल’ देवता को खुश करने के लिए यह युद्ध और नरसंहार करवाया गया। उसका इजरायल और दुनियाभर के असंख्य यहूदी धर्मावलंबियों द्वारा विरोध है।
वैश्विक पूजा
‘बाल’ देवता की पूजा विधि में कौन-कौन से वैश्विक नेता शामिल हुए थे, इसकी जानकारी एपस्टीन फाइल्स में है और यह पूरी जानकारी इजरायल की मोसाद के पास है। यह जानकारी यौन शोषण के कारनामों से भी अधिक भयानक और अघोरी है। मानवता को कलंकित करनेवाले कृत्य आज भी पृथ्वी पर खुलेआम चलते हैं और सुधारवादी, सुसंस्कृत कहलाने वाले राष्ट्रों के नेता अपनी राजनीतिक शक्ति बढ़ाने के लिए उन अमानवीय धार्मिक कृत्यों में शामिल होते हैं। हिंदू, ईसाई, मुसलमान, जैन, बौद्ध धर्मों में ऐसी अमानवीय विधियों को मान्यता नहीं है। ‘बाल’ यह यहूदियों के देवता हैं या नहीं, इस पर विवाद हैं, लेकिन शक्ति प्राप्त करने के लिए इस देवता की पूजा की जाती है और अंधविश्वास के कारण बलि भी दी जाती है। जब ऐसे अंधविश्वास को बड़े राष्ट्र और उनके नेता राजनीतिक स्वार्थ के लिए मान्यता देते हैं, तब समझना चाहिए कि दुनिया का अंत निकट है।
मार किसने खाई?
युद्ध में ईरान नष्ट हो गया है, ऐसा दावा राष्ट्रपति ट्रंप कर रहे हैं, लेकिन अमेरिका के सैन्य ठिकानों को जिन खाड़ी देशों ने अपनी जमीन इस्तेमाल करने दी, उन सभी देशों पर ईरान ने हमले किए। इजरायल की राजधानी तेल अवीव का भारी नुकसान हुआ। पूरी दुनिया का ‘ईंधन’ हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान ने रोक कर रखा है। ‘इजरायल अजेय है और उसकी सुरक्षा व्यवस्था अभेद्य है’, यह जो भ्रम और दंतकथा निर्माण हुई थी, उस पर ईरान ने हमला किया। दंतकथा की नींव ही ध्वस्त कर दी। सभी दंतकथाएं और भ्रम ध्वस्त हो गए। ‘दाढ़ी वाले’ अज्ञानी और धर्मांध हैं, वे बहादुर नहीं हैं, यह भ्रम भी ईरान ने झूठा साबित कर दिया। इजरायल के हवाई अड्डे, रिफाइनरी, मानवीय बस्तियां, अमीरों के टावर, उद्योग ईरान के हमलों में नष्ट हो गए हैं। इजरायल के लोगों को युद्ध नहीं चाहिए था, लेकिन राजनेताओं के अहंकार के कारण युद्ध हुआ और उसमें सामान्य नागरिक बेवजह मारे गए। नेतन्याहू, राष्ट्रपति ट्रंप युद्ध के लिए जितने जिम्मेदार हैं, उतने ही युद्धकाल में इजरायल को ‘फादरलैंड’ के रूप में मान्यता देनेवाले भी जिम्मेदार हैं। ये सभी लोग युद्ध अपराधी हैं। जनता को उन्हें सत्ता से नीचे खींचना चाहिए। लोगों ने आपको सत्ता इसलिए दी थी, ताकि आप अपनी जनता और देश का कल्याण करें, न कि दूसरों के देश में घुसकर युद्ध करने के लिए। सबसे पहले ‘संयुक्त राष्ट्र’ नामक संस्था पर ताला लगा देना चाहिए, क्योंकि उनकी बात अब कोई नहीं सुनता। बड़े राष्ट्र परवाह नहीं करते और छोटे राष्ट्रों के मन में भी संयुक्त राष्ट्र के प्रति सम्मान नहीं बचा है। हर एक का एक बाल देवता और फादरलैंड है। उन देवताओं की पूजा करके फादरलैंड के सामने वे आत्मसमर्पण करते हैं!
युद्ध क्यों हुआ, उसके पीछे की यही असली वजह है।
