संदीप पांडेय / मुंबई
कुर्लापश्चिम स्थित क्रिटीकेयर एशिया मल्टी-स्पेशलिटी हॉस्पिटल में डॉक्टरों की टीम ने एक बेहद दुर्लभ और जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए ५४ वर्षीय महिला की जान बचाई। मरीज के शरीर में पाया गया थायरॉयड ट्यूमर इतना बड़ा था कि उसका आकार मरीज के सिर से भी बड़ा हो गया था। इस जटिल ऑपरेशन का नेतृत्व प्रसिद्ध हेड एंड नेक सर्जन डॉ. संजय हेलाले ने किया।
मरीज अस्पताल में गर्दन में लगातार बढ़ती सूजन, सांस लेने में गंभीर तकलीफ, निगलने में परेशानी, आवाज बैठना और लेटने में असमर्थता जैसी समस्याओं के साथ पहुंची थी। जांच और स्वैâन में पता चला कि थायरॉयड ग्रंथि असामान्य रूप से बढ़कर जबड़े से लेकर छाती के भीतर तक पैâल चुकी है, जिससे श्वास नली संकरी हो गई थी और कभी भी सांस रुकने का खतरा पैदा हो सकता था।
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए ऑपरेशन से पहले वायुमार्ग को सुरक्षित करना सबसे बड़ी चुनौती थी। एनेस्थीसिया टीम ने पहले जागृत अवस्था में फाइबर-ऑप्टिक इंटुबेशन का प्रयास किया, लेकिन ट्यूमर के कारण वायुमार्ग अत्यंत संकरा और विकृत होने से यह प्रयास सफल नहीं हो सका। इसके बाद एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. सईदा खान और उनकी टीम ने एंडोस्कोपिक तकनीक तथा बौजी-सहायता से सफलतापूर्वक इंटुबेशन कर मरीज का वायुमार्ग सुरक्षित किया, जिसके बाद सुरक्षित रूप से एनेस्थीसिया दिया जा सका।
इसके पश्चात डॉ. संजय हेलाले ने सहायक सर्जन डॉ. राकेश बढ़े के साथ मिलकर अत्यंत जटिल टोटल थायरॉयडेक्टॉमी सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। वहीं मरीज के उपचार और चिकित्सा प्रबंधन में डॉ. शाहिद बरमारे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने अत्यंत सावधानी और कुशलता से दोनों रिकरेंट लेरिंजियल नसों और पैराथायरॉयड ग्रंथियों को सुरक्षित रखा, जिससे मरीज की आवाज और शरीर के मेटाबॉलिज्म पर कोई स्थायी प्रभाव नहीं पड़ा। ऑपरेशन के दौरान निकाली गई थायरॉयड ग्रंथि का आकार लगभग २५×२२ सेंटीमीटर था, जो भारतीय चिकित्सा साहित्य में दर्ज सबसे बड़े थायरॉयड ट्यूमर में से एक माना जा रहा है।
सर्जरी के बाद श्वास नली पर लंबे समय से पड़े दबाव और संभावित जोखिम को देखते हुए डॉ. हेलाले ने एहतियात के तौर पर मरीज की ट्रेकियोस्टॉमी भी की, ताकि ऑपरेशन के बाद वायुमार्ग सुरक्षित रखा जा सके और मरीज को सांस लेने में कोई परेशानी न हो। रिकवरी के दौरान मरीज को अस्थायी रूप से हाइपोवैâल्सीमिया (वैâल्शियम की कमी) और हल्का पल्मोनरी एडिमा हुआ, जिसे डॉक्टरों की टीम ने गहन निगरानी, इंट्रावीनस वैâल्शियम सप्लीमेंट, ऑक्सीजन थेरेपी और चेस्ट फिजियोथेरेपी के माध्यम से सफलतापूर्वक नियंत्रित कर लिया। कुछ दिनों के उपचार के बाद मरीज की स्थिति लगातार बेहतर होती गई। स्वस्थ होने के बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और अब वह सामान्य दैनिक जीवन जी रही है।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, इस दुर्लभ और अत्यंत जटिल मामले के सफल उपचार ने एक बार फिर यह साबित किया है कि क्रिटीकेयर एशिया मल्टी-स्पेशलिटी हॉस्पिटल में उन्नत तकनीक, अनुभवी विशेषज्ञों और समर्पित मेडिकल टीम की मदद से उच्च जोखिम वाले हेड और नेक सर्जरी के मामलों का भी सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है।
