मुख्यपृष्ठस्तंभतड़का : सड़क सुरक्षा: सामाजिक जिम्मेदारी

तड़का : सड़क सुरक्षा: सामाजिक जिम्मेदारी

कविता श्रीवास्तव

रंगों के त्योहार होली में जहां पूरे मुंबई शहर में उत्साह और उमंग का माहौल रहता है, वहीं कुछ लोगों की लापरवाही इस खुशी को दुख में बदल देती है। इसी खतरे को देखते हुए मुंबई ट्रैफिक पुलिस ने होली के अवसर पर विशेष अभियान चलाकर शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों तथा असुरक्षित ड्राइविंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। यातायात विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, होली के दौरान शहरभर में व्यापक नाकाबंदी और जांच अभियान चलाया गया। इस दौरान कुल १६,७२७ चालान जारी किए गए और लगभग १.९९ करोड़ रुपए का जुर्माना वसूला गया। इनमें से १५९ मामलों में ड्रंक एंड ड्राइव के तहत कार्रवाई की गई। इसके अलावा बड़ी संख्या में हेलमेट न पहनने, सीट बेल्ट का उपयोग न करने, ट्रिपल सीटिंग, सिग्नल तोड़ने और ओवरस्पीडिंग जैसे मामलों में भी वाहन चालकों को पकड़ा गया। कई ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किए गए और कुछ मामलों में कानूनी प्रक्रिया भी शुरू की गई। ये आंकड़े केवल उल्लंघनों की संख्या नहीं दर्शाते, बल्कि यह बताते हैं कि त्योहारों के समय सामाजिक जिम्मेदारी किस प्रकार पीछे छूट जाती है। हम सब जानते हैं कि शराब पीकर वाहन चलाना केवल कानूनी अपराध नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक गलती है। नशे की हालत में दुर्घटना की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। सड़क पर चल रहे पैदल यात्री, बच्चे, बुजुर्ग भी इस जोखिम का शिकार बनते हैं। सड़क दुर्घटनाओं से परिवार प्रभावित होते हैं। बच्चे अनाथ होते हैं। परिवारों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। अक्सर त्योहार का दिन, जो खुशियों के लिए होता है, कई परिवारों के लिए जीवनभर का दर्द बन जाता है। इसलिए यह समस्या व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक है। यदि समाज इसे केवल ‘चालान भरने’ की बात समझेगा, तो इसका समाधान अधूरा रहेगा। सुधार के लिए स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं को सड़क सुरक्षा पर विशेष अभियान चलाने चाहिए। ‘ड्रिंक एंड ड्राइव नहीं’ का संकल्प दिलाया जाना चाहिए। इसमें परिवार और मित्र भी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। कोई व्यक्ति शराब का सेवन करता है, तो उसे स्वयं वाहन चलाने से रोकना चाहिए और वैâब अथवा सार्वजनिक सेवा का उपयोग करना चाहिए। तकनीकी उपायों को भी मजबूत करना होगा। ज्यादा ब्रेथ एनालाइजर जांच, सीसीटीवी निगरानी और लाइसेंस निलंबन की त्वरित प्रक्रिया भी उपयोगी हैं। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बदलाव तब तक नहीं होगा जब तक लोग स्वयं यह नहीं समझेंगे कि सड़क पर अनुश्ाासन जीवन की सुरक्षा से जुड़ा है। तब तक समस्या बनी रहेगी। होली रंगों और प्रेम का त्योहार है। इसकी असली खुशी तभी है जब हर व्यक्ति सुरक्षित घर लौटे। मुंबई ट्रैफिक पुलिस का यह अभियान हमें याद दिलाता है कि कानून से ज्यादा जरूरी है सामाजिक चेतना। यदि हम सब जिम्मेदारी से वाहन चलाएं, तो न केवल दुर्घटनाएं कम होंगी, बल्कि त्योहार की खुशियां भी सुरक्षित रहेंगी। यही सच्ची सामाजिक प्रगति और सभ्यता की पहचान है।

 

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