अनिल मिश्र/पटना
बिहार के गयाजी शहर में घर-घर पाइपलाइन के माध्यम से रसोई गैस पहुंचाने की योजना नगर निगम की उदासीनता के कारण वर्षों से अटकी हुई है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि गया नगर निगम द्वारा गैस पाइपलाइन बिछाने वाले ठेकेदार को सड़क और गलियां खोदने के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) नहीं दिया गया, जिसके कारण 45 किलोमीटर लंबी एलपीजी गैस पाइपलाइन परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।
यह बात बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रतिनिधि सह प्रवक्ता विजय कुमार मिठ्ठू, पूर्व विधायक मोहम्मद खान अली, जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष बाबूलाल प्रसाद सिंह, राम प्रमोद सिंह, दामोदर गोस्वामी, प्रद्युम्न दुबे, शिव कुमार चौरसिया, टिंकू गिरी, राजीव कुमार सिंह उर्फ लबी सिंह और सुजीत गुप्ता सहित अन्य नेताओं ने कही।
नेताओं का कहना है कि गया शहर में कई वर्ष पहले गैस पाइपलाइन परियोजना शुरू की गई थी, लेकिन अब तक इसका लाभ केवल मानपुर क्षेत्र के वार्ड नंबर 50, 51, 52 और 53 के करीब तीन से चार हजार घरों तक ही सीमित है। इन इलाकों में ही पाइपलाइन के माध्यम से गैस चूल्हे जल रहे हैं, जबकि शहर के बाकी हिस्सों में यह सुविधा आज तक नहीं पहुंच सकी।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि यदि वर्ष 2021 में गया नगर निगम ने पाइपलाइन बिछाने वाले ठेकेदार को अनापत्ति प्रमाणपत्र दे दिया होता, तो आज गया शहर के अधिकांश घरों में पाइपलाइन से रसोई गैस पहुंच रही होती। इससे लोगों को गैस सिलेंडर के लिए लंबी लाइनों में खड़े होने की परेशानी से भी राहत मिल जाती।
नेताओं ने कहा कि वर्तमान समय में गैस आपूर्ति की स्थिति पहले से ही कठिन बनी हुई है। ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण देश में कमर्शियल गैस की आपूर्ति प्रभावित होने की खबरें सामने आ रही हैं। इसके साथ ही घरेलू गैस के दाम में करीब 60 रुपये की वृद्धि और गैस बुकिंग के अंतराल को 18 दिन से बढ़ाकर 25 दिन किए जाने के फैसले से आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में गैस सिलेंडर के लिए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। कई जगहों पर सिलेंडर की कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आ रही हैं, जहां 1000 रुपये का सिलेंडर 2000 से 3000 रुपये तक में बेचे जाने की बातें कही जा रही हैं।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि गया शहर में आज जो स्थिति बनी है, उसके लिए गया नगर निगम की कार्यशैली भी जिम्मेदार है। उनका कहना है कि पाइपलाइन बिछाने वाले ठेकेदार को नगर निगम से अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं मिलने के कारण ही परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।
नेताओं ने यह भी कहा कि यदि वर्ष 2023 तक यह परियोजना पूरी हो गई होती और घर-घर पाइपलाइन से गैस की आपूर्ति शुरू हो गई होती, तो आज गया के लोगों को गैस सिलेंडर की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। इससे शहर के हजारों परिवार सिलेंडर के झंझट से मुक्त हो जाते और उन्हें नियमित गैस आपूर्ति मिलती।
