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कोस्टल रोड और वर्ली सी-लिंक तक जोड़ेगा, देश का सबसे बड़ा गर्डर! … १२० मीटर की दूरी जोड़नेवाला है चार लेन का पुल

 ३० साल नहीं लगेगा जंग, १०० साल तक नहीं पड़ेगा कोई फर्क

सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबईकरों के सफर को रफ्तार देनेवाली कोस्टल रोड जहां उद्घाटन के लिए तैयार है, वहीं अब कोस्टल रोड और बांद्रा-वर्ली सी-लिंक को जोड़ने के लिए गर्डर्स लगाने का काम अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। कोस्टल रोड और बांद्रा-वर्ली सी-लिंक को जोड़ने के लिए २,५०० टन वजनी देश का सबसे भारी गर्डर लगाया जाएगा। इससे १२० मीटर की दूरी जुड़ जाएगी और एक तरफ दो लेन बन जाएगी। इस तरह की जानकारी मनपा प्रशासन की ओर से दी गई है।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे की संकल्पना के तहत मनपा की तैयार की जा रही महत्वाकांक्षी परियोजना का वर्तमान में ८६ प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। ‘सुखद प्रवास, खुली सांस, ब्रीद शब्द वाले कोस्टल रोड में प्रिंसेस स्ट्रीट से वर्ली सी-लिंक तक कुल १०.५८ किमी लंबा मार्ग बनाया जा रहा है। कोस्टल रोड के कुल मार्ग में तीन आंतरिक बदलाव और चार वाहन पार्विंâग का समावेश है। आंतरिक बदलाव की लंबाई १५.६६ किमी तक है। इस मार्ग में प्रियदर्शिनी पार्क से गिरगांव चौपाटी तक भूमिगत प्रत्येक में दो किमी लंबी और १२.२० मीटर व्यास वाली दो महाकाय सुरंगें हैं। इस परियोजना में पुल निर्माण के लिए देश का पहला सिंगल कॉलम फाउंडेशन और सकार्डो वेंटिलेशन सिस्टम लगाया गया है, वहीं अब इस परियोजना में पुल बनाने के लिए देश का सबसे वजनी गर्डर मार्च के अंत तक लगाया जाएगा। इस गर्डर को लगाने के बाद दो लेन का एक और गर्डर लगाया जाएगा।
पर्यावरण अनुकूल परियोजना,
समय-र्इंधन की होगी बचत
कोस्टल रोड परियोजना से ३४ प्रतिशत र्इंधन और ७० प्रतिशत समय की बचत होगी। इस परियोजना में समुद्री दीवार बनाने में इस्तेमाल किए गए चार से पांच टन के विशाल पत्थर लहरों के प्रभाव को कम कर रहे हैं और पत्थरों में बनी गुहाएं समुद्री जीवन की रक्षा भी कर रहे हैं। इसका परिणाम देखने को मिला है और अब यह बात सामने आ रही है कि समुद्री जीवन का संरक्षण हो रहा है। परियोजना में प्रियदर्शिनी पार्क से वर्ली-सी फेस तक ७.५ किलोमीटर का फुटपाथ बनाया जाएगा। यह फुटपाथ २० मीटर चौड़ा होगा। इसमें एक साइकिल ट्रैक भी होगा। इस जगह पर पार्क और मैदान विकसित किए जाएंगे, जिसमें ‘बटरफ्लाई पार्क’ भी शामिल होगा। इसमें स्लाइड, सी-सॉ बोर्ड, बच्चों के लिए झूले जैसी चीजें होंगी।
ये सुविधाएं भी मिलेंगी
अंडरग्राउंड पार्विंâग की क्षमता अमर संस में २५६ वाहन, महालक्ष्मी मंदिर और हाजी अली में १,२०० वाहन और वर्ली सी-फेस पर ४०० वाहन होगी। इस रूट पर गति सीमा ८० से १०० किमी प्रति घंटा होगी। परियोजना में निर्मित सुरंगें ‘न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग’ तकनीक से बनाई गई हैं और सुरंगें स्वचालित रूप से सुरक्षा प्रणाली से जोड़ी जाएंगी, ताकि आपात स्थिति में यात्रियों और वाहनों को सुरक्षित निकाला जा सके।

 

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