मुख्यपृष्ठनए समाचारड्रोन का जमाना लद गया ... अब कॉकरोच करेंगे जासूसी!

ड्रोन का जमाना लद गया … अब कॉकरोच करेंगे जासूसी!

-दुश्मनों के गली-कूचे तक संभव होगी रोबोटिक कॉकरोच की पहुंच
-जर्मनी की नई तकनीक ने उड़ाए दुनिया के होश
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
टेक्नोलॉजी के एडवांस होने के बाद कभी फिल्मी लगने वाली चीजें अब हकीकत होने लगी हैं। युद्ध अब केवल मोर्चों पर नहीं लड़े जाते। यूक्रेन रूस के बीच युद्ध हो, भारत के `ऑपरेशन सिंदूर’ की बात या अभी अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग की बात, हर कहीं ड्रोन का बोलबाला दिख रहा है, लेकिन अब ड्रोन भी पुराने होने जा रहे हैं। अब नई टेक्नोलॉजी तैयार हो रही है, जिसमें कॉकरोच को ही रोबोट में बदल दिया जाएगा और ये दुश्मन के इलाके में जाकर जासूसी समेत सारे जरूरी काम करेंगे।
बता दें कि जर्मन कंपनी SWARM Biotactics ऐसी टेक्नोलॉजी डेवलप कर रही है, जिसमें असली कॉकरोच के ऊपर इलेक्ट्रॉनिक बैकपैक लगाए जाएंगे। इनमें कैमरा, सेंसर और कम्युनिकेशन के लिए जरूरी सिस्टम होंगे। इस सिस्टम की मदद से कॉकरोच रियल-टाइम जानकारी जुटा सकेंगे और अपने आसपास के माहौल की जानकारी अपने कंट्रोलर तक भेज सकेंगे। इस टेक्नोलॉजी की एक और खास बात यह है कि दूर बैठा कंट्रोलर इन कॉकरोच को कंट्रोल भी कर सकेगा। यानी वह कॉकरोच को अपनी मर्जी से किसी भी दिशा में चला सकेगा। इसके लिए एक इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल का यूज किया जाएगा।
युद्ध ही नहीं, प्राकृतिक आपदाओं में भी आएंगे काम
इन कॉकरोच को न सिर्फ सैन्य जासूसी के लिए, बल्कि अन्य कामों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। उदाहरण के लिए भूकंप और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं से हुई दुर्घटना के बाद ढही हुई इमारतों में फंसे लोगों को ढूंढ़ने के लिए भी इन रोबोटिक कॉकरोच को भेजा जा सकता है। इससे ये राहत और बचाव दलों का काम आसान कर सकते हैं।
कॉकरोच को रोबोट क्यों बनाया जा रहा?
कॉकरोच को सबसे स्ट्रॉन्ग जीवों में से एक माना जाता है। यह किसी भी तरह की परिस्थिति में रह और एकदम संकरी से संकरी जगहों में घुस सकता है। इन कॉकरोच को उन इलाकों भेजने के लिए रोबोट बनाया जा रहा है, जहां ड्रोन, सैनिक या ट्रेडिशनल रोबोट नहीं पहुंच पाते। इसका एक और फायदा यह होगा कि ये कॉकरोच सुरंग और एकदम तंग जगहों पर भी जाकर जानकारी जुटा सकेंगे।

जर्मनी की एक कंपनी ऐसी टेक्नोलॉजी डेवलप कर रही है, जिसमें असली कॉकरोच के ऊपर इलेक्ट्रॉनिक बैकपैक लगाए जाएंगे। इनमें वैâमरा, सेंसर और कम्युनिकेशन के लिए जरूरी सिस्टम होंगे। इस सिस्टम की मदद से कॉकरोच रियल-टाइम जानकारी जुटा सकेंगे और अपने आसपास के माहौल की जानकारी अपने कंट्रोलर तक भेज सकेंगे।

अन्य समाचार