सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई के बाद्रा स्थित ‘जय शिव साई’ एसआरए प्रोजेक्ट पिछले २८ वर्षों से अधूरा पड़ा है, जिससे ५७८ झोपड़पट्टीवासियों का स्थायी पुनर्वास अब तक नहीं हो सका है। स्थानीय लोगों ने परियोजना में बिल्डर और अधिकारियों की मिलीभगत तथा भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। जानकारी के मुताबिक, अब तक केवल १६५ परिवारों को दो टावरों में शिफ्ट किया गया है, लेकिन इन इमारतों को अभी तक ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट (ओसी) नहीं मिला है और न ही यहां वैध पानी व ड्रेनेज की व्यवस्था है। वहीं झोपड़ियां तोड़े जाने के बाद करीब १०० परिवारों को नियमित किराया भी नहीं मिल रहा है। मनपा के टैक्स और पानी चोरी से जुड़े करीब ३.५ करोड़ रुपये से अधिक का बकाया भी बिल्डर पर है, लेकिन इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। पीडब्ल्यूडी की जमीन पर पिछले २० वर्षों से बने ट्रांजिट वैंâप जर्जर हो चुके हैं और वहां रहने वाले लोगों की जान को खतरा बना हुआ है। आरोप है कि इस जमीन के उपयोग के बदले ७० लाख रुपये से अधिक का किराया भी नहीं वसूला गया, जबकि यहां १८.६ मीटर चौड़ी सड़क का प्रस्ताव भी लंबित है। बताया जाता है कि यूडी जीआर ८९७/२००८ के तहत बिल्डर से करीब १८ करोड़ रुपये प्रीमियम वसूल किए जाने थे, जो अब तक जमा नहीं किए गए। इसके बावजूद वर्ष २००८ में अनुमति के बिना १६५ पुनर्वसन फ्लैट बनाए गए। हाई कोर्ट के आदेश के बाद बिल्डर ने २०२१ तक प्रकल्प पूरा करने का बार चार्ट दिया था, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ा। एसआरए ने जून २०२४ में बिल्डर को हटाने के लिए नोटिस भी जारी किया था, फिर भी उसे अब फरवरी २०२९ तक का नया समय दिया गया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिल्डर ने सीटीएस नंबर ६१५ की सरकारी आरक्षित जमीन पर कब्जा कर करीब ३००० वर्ग मीटर टीडीआर का गैरकानूनी दावा किया है, लेकिन अधिकारियों ने अब तक कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की है। इससे प्रभावित ५७८ परिवारों में भारी नाराजगी है। शिकायकर्ता में चेयरमैन शिवपूजन गोस्वामी, कमेटी मेंबर में दीपक पवार, विनय शिगवन, प्रकाश मोरे, दीनानाथ, सामाजिक कार्यकर्ता नीता शर्मा और प्रकाश मिश्रा के नाम शामिल हैं।
