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महायुति राज में जारी है पर्यावरण का कत्ल…अब ठाणे मेट्रो की भेंट चढ़ेंगे ३,००० पेड़!

– जामुन, बरगद, पीपल, आम और गुलमोहर के वृक्षों पर चलेगी कटार

– २९ किमी रिंग मेट्रो परियोजना से पर्यावरण को होगी अपूरणीय क्षति

सामना संवाददाता / मुंबई

ठाणे मेट्रो की राह में आनेवाले वृक्षों का बड़ी संख्या में सफाया होनेवाला है। महायुति राज में पर्यावरण के इस कत्ल को लेकर महायुति सरकार के खिलाफ लोगों में भारी नाराजगी है।
बता दें कि ठाणे वृक्ष प्राधिकरण ने २९ किलोमीटर लंबी आंतरिक रिंग मेट्रो के लिए ३,२२४ पेड़ों को काटने या स्थानांतरित करने की योजना बनाई है। स्थानीय निवासियों और पर्यावरणविदों ने इसे लेकर गंभीर चिंता जताई है। खासकर उपवन झील और वागले एस्टेट के आसपास के लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया है। हालांकि, इस परियोजना को अंतिम मंजूरी देने से पहले जनता से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं, जिसके बाद निवासियों और पर्यावरणविदों ने इसे पर्यावरण से खिलवाड़ बताया है। बता दें कि शहर भर में यातायात जाम को कम करने के लिए डिजाइन की गई ‘रिंग मेट्रो’ का निर्माण २०२९ तक पूरा होने की उम्मीद है।
पर्यावरण पर असर
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, २,६९३ पेड़ों को प्रत्यारोपण के लिए चिह्नित किया गया है, जबकि शेष पेड़ों को काटा जाएगा। इनमें जामुन, बरगद, पीपल, आम और गुलमोहर जैसी प्रजातियों के पेड़ शामिल हैं। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में सुरम्य उपवन झील क्षेत्र और वागले एस्टेट का औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं।
खतरे में ‘हरियाली क्षेत्र’ का दर्जा
स्थानीय नागरिक वृक्ष प्रत्यारोपण की सफलता दर को लेकर संशय में हैं, क्योंकि स्थानांतरित पेड़ों के जीवित रहने की दर का इतिहास अच्छा नहीं रहा है। यह परियोजना घोड़बंदर सड़क चौड़ीकरण और बुलेट ट्रेन परियोजना सहित कई बुनियादी ढांचागत कार्यों के बाद शुरू की गई है, जिनमें सामूहिक रूप से हजारों पेड़ काटे गए हैं, जिससे यह आशंका पैदा हो गई है कि ठाणे तेजी से अपना ‘हरियाली क्षेत्र’ का दर्जा खो रहा है।

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