आरपीएफ और अधिकारियों की मिलीभगत का झोल
प्रेम यादव / भायंदर
मीरा-भायंदर में रेलवे रिजर्वेशन टिकट को लेकर गंभीर अव्यवस्था और कथित काला बाजारी का मामला सामने आ रहा है। यात्रियों का आरोप है कि टिकट प्राप्त करना आम लोगों के लिए दिन-ब-दिन कठिन होता जा रहा है, जबकि दलालों के लिए यह एक संगठित और लाभदायक कारोबार बन चुका है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, टिकट काउंटर पर लंबी कतारों में खड़े रहने के बावजूद भी उन्हें रिजर्व टिकट नहीं मिल पाता। दूसरी ओर दलाल वही टिकट आसानी से उपलब्ध करा देते हैं, लेकिन इसके बदले प्रति टिकट १,५०० से २,००० रुपए तक अतिरिक्त वसूली की जाती है। इस कारण गरीब और मध्यम वर्ग के यात्रियों के सामने यात्रा करना भी मुश्किल हो गया है। भायंदर रेलवे स्टेशन पर स्थिति और भी चिंताजनक बताई जा रही है। यात्रियों के अनुसार, रात से ही लंबी लाइन लगती है और सुबह टिकट खिड़की खुलने पर लोगों को अंदर जाने दिया जाता है, हालांकि लोग नंबर लिखाकर रात में चले जाते हैं और जल्दी सुबह आकर नंबर के हिसाब से लाइन में खड़े हो जाते हैं, लेकिन आरोप है कि कतार में सबसे आगे खड़े कई लोग दलालों के ही आदमी होते हैं। दलालों के लोग जहां खड़े होते हैं, लाइन वहीं से शुरू होती है। लोगों का कहना है कि आरपीएफ के लोग दलालों से मिले हुए हैं, जो आसानी से दलालों के आदमियों को आगे बढ़ा देते हैं।
ऑनलाइन बुकिंग में भी दलालों की घुसपैठ
ऑनलाइन बुकिंग की स्थिति भी यात्रियों के लिए राहत देने वाली नहीं है। कई लोगों का कहना है कि जैसे ही टिकट बुकिंग खुलती है, कुछ ही सेकेंड में टिकट ‘फुल’ दिखने लगता है। इसके पीछे दलालों द्वारा कई आईडी और तकनीकी तरीकों के इस्तेमाल की आशंका जताई जा रही है। कई मामलों में दलालों का नेटवर्क इतना मजबूत बताया जा रहा है कि वे कम भीड़ वाले दूसरे राज्यों के रेलवे स्टेशनों से भी टिकट निकलवा लेते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि किसी यात्री को मुंबई से उत्तर प्रदेश जाना है तो दलाल गुजरात, कर्नाटक या फिर बिहार, यूपी या अन्य राज्यों के स्टेशनों से टिकट बुक करवा देते हैं, जिससे स्थानीय यात्रियों को टिकट नहीं मिल पाता।
अंतरराज्यीय टिकट गिरोह भी सक्रिय
कई मामलों में अंतरराज्यीय गिरोह भी सामने आए हैं, जो अलग-अलग राज्यों से टिकट बुक करके उन्हें महंगे दामों पर बेचते हैं। स्थानीय यात्रियों का कहना है कि यदि इस पूरे नेटवर्क की गंभीरता से जांच की जाए तो इसमें कुछ अधिकृत एजेंटों के साथ-साथ अंदरूनी अधिकारियों की मिलीभगत की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। लोगों की मांग है कि रेलवे प्रशासन, आरपीएफ और जीआरपी इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करें और रिजर्वेशन टिकट प्रणाली को पारदर्शी बनाएं, ताकि आम नागरिक को उसका हक मिल सके। यदि समय रहते इस समस्या पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो यह दलाली का जाल और भी बड़ा रूप ले सकता है, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर आम यात्रियों को भुगतना पड़ेगा।
